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केरल के 1248 मंदिरों के दान में आए सैंकड़ों टन पीतल के बर्तन और दीपक बेचे जाएंगे https://ift.tt/2X6XhtA

लॉकडाउन के चलते देश में कई मंदिरों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा रही है। इन सब के बीच केरल में मंदिरों की आय बढ़ाने और आर्थिक आधार को मजबूत करने के लिए त्रावणकोर देवास्वम् बोर्ड (टीडीबी) केरल के मंदिरों में रखे अनयूज्ड बर्तन और तांबे-पीतल को बेचने जा रहा है। इनकी मात्रा कई सौ टन में है। टीडीबी केरल में 1248 मंदिरों के प्रबंधन का काम करता है। इसमें प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर, तिरुवनंतपुरम में पद्मनाभस्वामी मंदिर, हरिपद श्री सुब्रह्मण्य मंदिर, एट्टमनूर महादेवा मंदिर और अंबालापुजा श्री कृष्ण मंदिर शामिल हैं। हालांकि, टीडीबी के इस फैसले से कई लोगों में निराशा और गुस्सा भी है। सोशल मीडिया पर लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं।

फिलहाल, हिसाब तैयार हो रहा

टीडीबी उन दीपकों और बर्तनों की नीलामी करने की योजना बना रहा है जो भक्तों द्वारा दान किए गए थे। टीडीबी अभी इसका हिसाब बना रहा है। इससे एक बड़ी राशि मिलने की उम्मीद है। केरल में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनमें धातु के दीपकों और बर्तनों की बड़ी मात्रा में दान आता है। जैसे सबरीमाला और गुरुवायूर मंदिर। इन एक-एक दीपक की कीमत 3000 से 5000 के बीच होती है। केरल के सभी 1248 मंदिरों में बड़ी मात्रा में ऐसे दीपक और अन्य बर्तन हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।

संभालना आसान नहीं

ऐसे बर्तनों और दीपकों को संभालना और उनका ऑडिट करवाना ज्यादा मुश्किल काम है। इस स्थिति को देखते हुए बोर्ड ने फैसला किया है कि इस तरह की सारी सामग्रियों की नीलामी कर दी जाएगी। इससे आने वाली राशि से काफी काम हो सकेंगे। कई प्रोजेक्ट्स पूरे हो सकेंगे। बोर्ड के जनसंपर्क विभाग का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। पहले भी ऐसा होता आया है। पहले मंदिरों से इन दीपक और बर्तनों को फिर से पीतल बनाने के लिएबेचा जाता था लेकिन उससे कोई रेवेन्यू नहीं मिलता था। इसलिए, इस बार इन्हें ऐसे ही बेचा जाएगा।

गुरुवायुर और सबरीमाला मंदिर के अलावा भी केरल के कई देवी मंदिरों में सुख-शांति और गृहस्थ सुख के लिए पीतल के बर्तनों और दीपकों का दान किया जाता है।
  • केरल में रिवाज है नेयविल्लकु समरपनम्

केरल में मंदिरों में पीतल के बड़े-बड़े दीपक दान करने का रिवाज है। इसे नेयविल्लकु समरपनम् कहा जाता है। यहां मान्यता है कि घी के दीपक दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। यहां गुरुवायूर मंदिर में रोज लगभग 8000 से 9000 तक दीपक दान में आते हैं। उसी तरह, कई मंदिरों में पीतल के बर्तन जैसे उरुली (एक बड़ा खुला बर्तन) दिया जाता है। न्य देवी मंदिरों में भी, भक्तों द्वारा पीतल के उरुलियां दी जाती हैं। इसी तरह से कई अन्य पीतल की चीजें जैसे थट्टू (प्लेट्स), देवताओं की छोटी मूर्तियां, बर्तन आदि। ऐसे में इन सबको संभालने के लिए एक बड़ी जगह का आवश्यकता होती है। इन्हें संभाले रखने का कोई अर्थ भी नहीं है।

  • सबसे बड़े धार्मिक बोर्ड में है त्रावणकोर

त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड देश के सबसे बड़े धार्मिक बोर्ड्स में से है। इसके अधिकार में 1248 मंदिर आते हैं। कैग (CAG) और केरल हाईकोर्ट के लोकपाल की निगरानी में इसका सारा काम होता है। टीडीबी में लगभग 6500 कर्मचारी हैं, जिनमें ज्यादातर ज्यादातर पुजारी, सहायक पुजारी, मंदिर के कलाकार, कलाकार और अन्य मंदिर व्यवस्थापक कर्मचारी हैं। टीडीबी कर्मचारी सरकारी कर्मचारी की तरह ही होते हैं और इसलिए उन्हें सभी सरकारी लाभ मिलते हैं, जैसे निश्चित वेतन, रिटायरमेंट के बाद पेंशन।



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केरल में मंदिरों की आय बढ़ाने के लिए त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड (टीडीबी) मंदिरों में रखे अनयूज्ड बर्तन और तांबे-पीतल को बेचने जा रहा है।


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