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Showing posts from September, 2020

अभी तक हुए 16 चुनावों में कब कितने मुस्लिम विधायक बने? पिछले तीन चुनावों से किसे वोट डालता है मुस्लिम वोटर https://ift.tt/30mVpOk

बिहार आबादी के लिहाज से देश का तीसरा बड़ा राज्य है। मुस्लिम आबादी भी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद यहां सबसे ज्यादा है। प्रदेश की 243 सीटों में से 38 ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटर 20% से ज्यादा हैं। ये वोट महा गठबंधन का परंपरागत वोट बैंक कहे जाते हैं। लेकिन, जदयू, लोजपा जैसे एनडीए के दलों को भी मुस्लिम वोट मिलता है। इस चुनाव में मुस्लिम वोटर किस तरफ जाएगा ये तो 10 नवंबर को पता चलेगा। लेकिन, पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटर किसके साथ रहा है और कितने मुस्लिम विधायक बन रहे हैं, आइए जानते हैं... पिछली बार 23 मुस्लिम विधायक चुने गए थे 2015 के चुनाव में 23 मुस्लिम विधायक चुनकर आए थे। 2000 के चुनावों के बाद ये पहली बार था, जब इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम विधायक जीते थे। 2000 के चुनाव में 29 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। 2015 में सबसे ज्यादा 11 मुस्लिम विधायक राजद से थे। कांग्रेस के 27 विधायकों में से 6, जदयू के 71 में 5 मुस्लिम विधायक बने। भाजपा के 53 में से एक भी विधायक मुस्लिम नहीं है। 1985 में सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक जीतकर आए थे 1951 में बिहार में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। उस व...

कहानी बिहार के उस बाहुबली और उसकी पत्नी की, जो जेल में रहते हुए भी चुनाव जीता; पहला नेता, जिसे मौत की सजा मिली थी https://ift.tt/3ihDq1W

बिहार के सहरसा जिले में एक गांव पड़ता है। नाम है पनगछिया। इस गांव में 26 जनवरी 1956 को एक लड़के का जन्म होता है। उसके दादा राम बहादुर सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे। ये लड़का जब 17 साल का था, तब बिहार में जेपी आंदोलन शुरू होता है और यहीं से उसके राजनीतिक करियर की शुरुआत भी। आपातकाल के बाद जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो 1978 में उस समय के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई सहरसा आए थे। उस समय इस 22 साल के लड़के ने उन्हें काले झंडे दिखाए। कहते हैं कि बिहार की राजनीति दो चीजों पर चलती है। पहली है जाति और दूसरी है दबंगई। इस लड़के ने इन दोनों का ही सहारा लेकर राजनीति में कदम रखा। इस लड़के की इतनी बात हो चुकी है, तो अब नाम भी जान ही लीजिए। उसका नाम है आनंद मोहन सिंह। बिहार की राजनीति के बाहुबली नेता आनंद मोहन। जो इस वक्त एक डीएम की हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं। इनकी पत्नी और पूर्व सांसद लवली आनंद हाल ही में राजद में शामिल हुई हैं। आनंद मोहन और लवली की शादी 13 मार्च 1991 को हुई थी। आनंद मोहन एक बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। लवली आनंद एक बार की सांसद हैं। 1983 में तीन महीने जेल में...

कुमार विश्वास बोले- कब तक मौन रहोगे विदुरों? कब अपने लब खोलोगे, जब सर ही कट जायेगा तो किस मुंह से क्या बोलोगे? https://ift.tt/3ikzPjL

इस वीडियो में मैं थोड़ा ज्यादा गुस्से में आ गया, एक दो बार गला भी भर आया है😢! पर आप सब मेरे चाहने वालों से, साहित्य से, भाषा से, उसकी मर्यादा से मैं माफ़ी नहीं मांगना चाहता ! यह जनबोधी कविता, यह ग़ुस्सा मेरे वंश की परम्परा है ! जिन्हें बुरा लगा हो वे मुझे गरियाने के लिए स्वतंत्र हैं 😢🙏 । उपनिषद भी कहता है कि कूपमंडूक की तरह अब भी अगर हम इस अंधियारी कोठरी से बाहर नहीं निकले तो धीरे-धीरे इस अनाचारी असुर लोक के ऐसे अंधकार में प्रवेश कर जाएंगे जो स्वयं हमारे विनाश का कारण बनेगा 👎। “असूर्य नाम ते लोकाः अंधे तमसावृताः।।” उन्नीस सौ बासठ की चीन से लड़ाई के वक्त अपनी जरूरी जिम्मेदारी से बेखबर अपनी ही सरकार से अपनी कविता “परशुराम की प्रतीक्षा” में जब राष्ट्रकवि दिनकर जी ने सवाल पूछा था तो एक पंक्ति लिख दी थी, “छागियो करो अभ्यास रक्त पीने का !” अपनी डायरी में दिनकर जी ने लिखा है कि मुझे एक शालीन कवि होने के नाते रक्त पीने जैसी बात शायद नहीं लिखनी चाहिए थी पर मैंने इसलिए लिख दी है ताकि आने वाले कल में इतिहास याद रखें कि जब सब सरकारी सरोकारी लोग मौन थे तो इस देश के एक कवि को इतना गुस्सा आया...

हर 4 नए संक्रामक रोगों में से 3 का कारण जानवर हैं, मांसाहारी खाने में पानी की बर्बादी 15 गुना ज्यादा होती है; मीट डाइट छोड़ने में 8 तरीके करेंगे मदद https://ift.tt/3iiW6OP

दुनिया कोरोनावायरस से जूझ रही है। हमने साल 2020 का आधे से ज्यादा वक्त संक्रमण के डर में गुजार दिया है। इसी महामारी के दौरान हम पहली बार वर्ल्ड वेजिटेरियन डे भी मना रहे हैं। कोरोना की शुरुआत में कहा जा रहा था कि यह चमगादड़ों के जरिए फैला। बाद में इसमें पेंगोलिन का नाम भी शामिल हुआ। हालांकि, यह जानना जरूरी है कि क्या मांस खाने की आदत इंसान के लिए जानलेवा भी बनी हुई है। वैज्ञानिक इस बात की चेतावनी देते हैं कि कोरोनावायरस के बाद भी हमें कई महामारियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में हमें जानवरों से फैलने वाली बीमारियों पर गौर करने की जरूरत है। 4 में से 3 नए संक्रमण जानवरों से आते हैं सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, हम रोज कई तरह से जानवरों के संपर्क में आते हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि जानवरों में रहने वाले कुछ जर्म्स आपको बीमार भी कर सकते हैं। जानवरों के जरिए इंसानों तक पहुंचने वाले जर्म्स से होने वाली बीमारियों को जूनोटिक बीमारी कहते हैं। इन जर्म्स के कारण मौत भी हो सकती है। सीडीसी के अनुसार, जूनोटिक बीमारियां काफी आम होती हैं। वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगाया ...

आज इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्संस; सिविल वॉर के खत्म होने पर चीन समाजवादी रिपब्लिक बना था https://ift.tt/36mgA6U

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में पूरी दुनिया में 1991 से हर साल एक अक्टूबर को इंटरनेशनल डे फॉर ओल्डर पर्संस यानी अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस या अंतरराष्ट्रीय वरिष्‍ठ नागरिक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है बुजुर्गों को उनके अधिकार दिलवाना। 14 दिसंबर 1990 को यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली ने तय किया था कि एक अक्टूबर को इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्संस के तौर पर मनाया जाए। इससे पहले 1982 में वर्ल्ड असेंबली ऑन एजिंग ने विएना इंटरनेशनल प्लान ऑफ एक्शन ऑन एजिंग को पास किया था। एक साल बाद यूएन की जनरल असेंबली ने भी इस पर मुहर लगाई थी। भारत में 2007 में माता-पिता एवं वरिष्‍ठ नागरिक भरण-पोषण विधेयक पारित किया गया। इसमें माता-पिता के भरण-पोषण, वृद्धाश्रमों की स्थापना, चिकित्‍सा सुविधा की व्यवस्था और वरिष्‍ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। 1949 में हुई थी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना 1912 में क्विंग राजशाही का अंत हुआ और रिपब्लिक ऑफ चीन बना। यहीं से चीन का आधुनिक इतिहास शुरू हुआ। उस समय चीन को रिपब्लिक घोषित करने वाले नेशनलिस्ट नेता थे। इस दौरान वहां कम्युन...

लोगों की नजरों से बचने को मैं मर्द बन गई, बाल काटे, पगड़ी बांधी, रात-बेरात खेतों में पानी देने जो जाना पड़ता था https://ift.tt/3ipjaM8

सफेद कुर्ता पाजामा, सर पर बंधा सफेद साफा, कंधे पर रखा फावड़ा। कमला को कोई दूर से क्या, पास से भी देखे तो धोखा खा जाए कि कोई पुरुष खेत में काम कर रहा है। दिल्ली से करीब 120 किलोमीटर दूर मुजफ्फरनगर के मीरापुर दलपत गांव की रहने वाली 63 साल की कमला ने अपनी जिंदगी के चार दशक मर्द बनकर खेतों में काम करते हुए गुजार दिए। एक महिला के लिए मर्द बनकर काम करना आसान नहीं था। लेकिन, जिंदगी के सामने ऐसे मुश्किल हालात थे कि उन्होंने घूंघट उतारकर सर के बाल काट लिए और पगड़ी बांध ली। किसान परिवार में पैदा हुई कमला होश संभालते ही खेतों में काम करने लगी थीं। शादी हुई तो 17 महीने बाद ही पति की दुखद मौत हो गई। बाद में देवर के साथ उन्हें 'बिठा दिया' गया। इस रिश्ते से उन्हें एक बेटी हुई लेकिन, ये रिश्ता ज्यादा नहीं चल सका और वो अपने भाइयों के घर लौट आईं। कमला के छोटे भाई को कैंसर हो गया। दम तोड़न से पहले उन्होंने कमला से वादा लिया कि वो उनके बच्चों को पालेंगी और पत्नी का ध्यान रखेंगी। कमला कहती हैं, भाई के दोनों बच्चे छोटे थे। कोई सहारा नहीं था। मैंने उनकी जिम्मेदारी संभाल ली और खेती का काम अपने हाथ ...

लाखों की नौकरी छोड़ ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी शुरू की, एक सीजन में 12 लाख रु. की कमाई, 5 लोगों को रोजगार भी दिया https://ift.tt/3kZJQoe

महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंकलखोप गांव के रहने वाले शीतल सूर्यवंशी एमबीए करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते थे। लाखों की सैलरी थी, 6 साल तक उन्होंने अलग-अलग पोस्ट पर काम किया। लेकिन, 2015 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी का बिजनेस शुरू किया। आज हर दिन 4 टन अमरूद उनके बगीचे से निकलता है। मुंबई, पुणे, सांगली सहित कई शहरों में वे अमरूद भेजते हैं। एक सीजन में 12 लाख रुपए की कमाई हो रही है। 34 साल के शीतल के पिता किसान हैं। दो भाई जॉब करते हैं, एक डॉक्टर है और दूसरा आर्किटेक्ट। शीतल कहते हैं, ' जब नौकरी छोड़कर खेती करने का फैसला लिया तो परिवार ने विरोध किया। उनका कहना था कि अच्छी खासी नौकरी छोड़कर खेती क्यों करना चाहते हो, खेती में मुनाफा ही कितना है..? वो कहते हैं कि हम जहां रहते हैं वहां के ज्यादातर किसान गन्ने की खेती करते हैं। मेरे पिता भी गन्ने की खेती करते थे लेकिन इसमें ज्यादा मुनाफा नहीं होता था। ऊपर से समय भी ज्यादा लगता था। एक फसल तैयार होने में 15-16 महीने लग जाते थे। साथ ही फैक्ट्री में बेचने के बाद पैसे देर से अकाउंट में आते थे। 2015 मे...

बाबरी मस्जिद का फैसला अगर उल्टा आता तो भारतीय लोकतंत्र और हिंदुत्व की राजनीति में जो स्वस्थ प्रवृत्तियां उभर रही हैं, वे शिथिल पड़ जातीं https://ift.tt/3cJzFRI

बाबरी मस्जिद को गिराने के बारे में अब जो फैसला आया है, उस पर तीखा विवाद छिड़ गया है। इस फैसले में सभी कारसेवकों को दोषमुक्त कर दिया गया है। कुछ मुस्लिम संगठनों के नेता कह रहे हैं कि यदि मस्जिद गिराने के लिए कोई भी दोषी नहीं है तो फिर वह गिरी कैसे? सरकार और अदालत ने अभी तक उन लोगों को पकड़ा क्यों नहीं, जो मस्जिद ढहाने के दोषी थे? जो सवाल हमारे कुछ मुस्लिम नेता पूछ रहे हैं, उनसे भी ज्यादा तीखे सवाल अब पाकिस्तान के नेता, अखबार और चैनल पूछेंगे। इस फैसले को लेकर देश में सांप्रदायिक असंतोष और तनाव फैलाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। मान लें कि सीबीआई की अदालत श्री लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरलीमनोहर जोशी और उमा भारती जैसे सभी आरोपियों को सजा देकर जेल भेज देती तो क्या होता? पहली बात तो यह कि इन नेताओं ने बाबरी मस्जिद के उस ढांचे को गिराया है, इसका कोई भी ठोस या खोखला-सा प्रमाण भी उपलब्ध नहीं है। यह ठीक है कि ये लोग उस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे लेकिन इनमें से किसी ने उस ढांचे की एक ईंट भी तोड़ी हो, ऐसा किसी फोटो या वीडियो में नहीं देखा गया। इसके विपरीत इन नेताओं ने उस वक्त भीड़ को काबू करने क...

ट्रम्प का कहना है- पर्यावरण बचाना लोगों को बेरोजगार करना है, जबकि बाइडेन नौकरियों के साथ पर्यावरण बचाने के पक्षधर हैं https://ift.tt/36mqKVa

जब भी मैं शक्की लोगों के साथ कोविड-19 या जलवायु परिवर्तन पर बात करता हूं तो मैं एक उपमान का इस्तेमाल करता हूं: कल्पना करें कि आपका बच्चा बीमार है और आप उसे 100 डॉक्टरों को दिखाने ले जाते हैं। इनमें से 99 डॉक्टर एक ही बात कहते हैं और इलाज की सलाह देते हैं। जबकि एक अन्य कहता है कि चिंता की कोई बात नहीं है, बच्चे की बीमारी जादू जैसे गायब हो जाएगी। क्या माता-पिता सौ में से इस एक डॉक्टर की सलाह मानेंगे? इसे आप मनगढ़ंत न मानें। असल में अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटर के सामने यही सबसे बड़ा सवाल है। क्या आप अपने बच्चे या देश की सेहत को उस व्यक्ति के हाथों में देंगे, जो कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन पर 100 में से एक डॉक्टर की सलाह मानता हो। वह ट्रम्प यूनिवर्सिटी के डॉ. डोनाल्ड ट्रम्प हैं, जहां से उन्होंने बीएस की डिग्री ली है। यह मेरे लिए चौंकाने वाला है कि कितने परंपरावादी सौ में से ऐसे एक डॉक्टर की सलाह को मानेंगे। हो सकता है कि ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के लोग प्रकृति में रुचि न रखते हों, लेकिन प्रकृति की उनमें रुचि है। जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 दोनों ने ही पिछले एक साल में हमारी जिंदगी...

बीते 50 सालों में 70% बीमारियां जानवरों से फैली हैं, इसीलिए रिसर्च कहती हैं कि बचना है तो डाइट में फल-सब्जियां आज से ही बढ़ा लें https://ift.tt/33hQXm3

वायरस के संक्रमण से बचना है तो वेजिटेरियन डाइट ही सेफ विकल्प है। स्वाइन फ्लू से लेकर कोरोना का संक्रमण फैलाने तक में जानवर एक बड़ी कड़ी साबित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, पिछले 50 सालों में 70 फीसदी वैश्विक बीमारियां जानवरों के जरिए फैली हैं। कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि हृदय रोग, कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम करना चाहते हैं तो वेजिटेरियन डाइट लें। खाने में फल-सब्जियों की मात्रा को बढ़ाएं। आज वर्ल्ड वेजिटेरियन डे है, इस मौके पर जानिए शाकाहारी खाना आपकी जिंदगी में कितना बदलाव जाता है.... 4 वजह: वेजिटेरियन खाना क्यों बेहतर है 1. वायरल डिसीज का खतरा कम हो जाता है 2013 में आई यूनाइटेड नेशंस की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट कहती है, दुनियाभर में 90% से ज्यादा मांस फैक्ट्री फार्म से आता है। इन फार्म्स में जानवरों को ठूंस-ठूंसकर रखा जाता है और यहां साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता। इस वजह से वायरल डिसीज फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में गुजरात में फैली वायरल डिसीज कांगो फीवर में भी संक्रमित जानवरों से इंसान को खतरा बताया गया है। 2. दिल ज्यादा ख...

कॉफी के बीज खाकर पहली बार बकरियां झूमने लगीं थीं, जब इसकी भुनी खुशबू नशे की तरह चढ़ी तो ये इंसानों के भी मुंह लग गई https://ift.tt/3l2VnDf

अमूमन लोग कॉफी तब पीते हैं, जब बॉडी में एनर्जी की कमी महसूस करते हैं या तनाव से जूझ रहे होते हैं। लेकिन, कॉफी के सबसे पुराने ठिकाने इथियोपिया में ऐसा नहीं है। यहां की हर दावत में आपको कॉफी मिलेगी। अफ्रीकी देश इथियोपिया को कॉफी का जन्मस्थल कहते हैं। आज वर्ल्ड कॉफी डे है, इस मौके पर कॉफी के सबसे बड़े ठिकाने से जानिए 4 दिलचस्प किस्से... 1. जब कॉफी के बीज खाने के बाद बकरियां झूमने लगी थीं इथियोपिया में कॉफी की खुशबू को कैसे पहचाना गया, इसका यहां एक सबसे दिलचस्प किस्सा मशहूर है। एक समय यहां कालदी नाम का चरवाहा अपनी बकरियों को काफा के जंगल से लेकर निकलता था। एक दिन उसने देखा, यहां जमीन पर पड़ी लाल चेरियां खाने के बाद बकरियां खुशी से झूम रही हैं। चरवाहे ने कुछ चेरियां तोड़ीं और खाईं। स्वाद पसंद आने पर चेरियों को अपने चाचा के पास ले गया। चाचा बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और मठ में रहते थे। उन्होंने मजहबी बंदिश के कारण कॉफी की चेरी को आग में डाल दिया। जैसे ही बीजों ने जलना शुरू किया उसकी खुशबू नशे की तरह चढ़ने लगी। इसके बाद कालदी के चाचा ने इन बीजों का इस्तेमाल खुशबू के लिए करना शुरू किया। इन्ही...

कर्मचारियों के DA कटौती का आदेश वापस ले रही है मोदी सरकार? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई https://ift.tt/3cJwkCp

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के DA की कटौती का आदेश वापस ले लिया है। दावे के साथ एक आदेश की कॉपी भी वायरल हो रही है। ये आदेश 21 सितंबर का बताया जा रहा है। दरअसल, कोविड-19 लॉकडाउन के चलते हुई आर्थिक सुस्ती को देखते हुए मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की तीन अतिरिक्त किश्तों पर रोक लगाने का फैसला लिया था। केंद्र सरकार के इस फैसले का असर 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ा है। अब दावा किया जा रहा है कि ये आदेश वापस ले लिया गया है। और सच क्या है? इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली, जिससे पुष्टि होती हो कि केंद्र सरकार ने DA कटौती का आदेश वापस ले लिया है। वायरल हो रही चिट्‌ठी को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि ये DA कटौती वापस लेने का आदेश नहीं है। बल्कि, केंद्र सरकार में जनरल सेक्रेटरी डॉ. एम रघवैय्या द्वारा लिखा गया एक आवेदन पत्र है, जो कि वित्त मंत्री को लिखा गया है। इस पत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया गया है कि वे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को डियरनेस अल...

आज इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्संस; सिविल वॉर के खत्म होने पर चीन समाजवादी रिपब्लिक बना था https://ift.tt/34bT3mK

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में पूरी दुनिया में 1991 से हर साल एक अक्टूबर को इंटरनेशनल डे फॉर ओल्डर पर्संस यानी अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस या अंतरराष्ट्रीय वरिष्‍ठ नागरिक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है बुजुर्गों को उनके अधिकार दिलवाना। 14 दिसंबर 1990 को यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली ने तय किया था कि एक अक्टूबर को इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्संस के तौर पर मनाया जाए। इससे पहले 1982 में वर्ल्ड असेंबली ऑन एजिंग ने विएना इंटरनेशनल प्लान ऑफ एक्शन ऑन एजिंग को पास किया था। एक साल बाद यूएन की जनरल असेंबली ने भी इस पर मुहर लगाई थी। भारत में 2007 में माता-पिता एवं वरिष्‍ठ नागरिक भरण-पोषण विधेयक पारित किया गया। इसमें माता-पिता के भरण-पोषण, वृद्धाश्रमों की स्थापना, चिकित्‍सा सुविधा की व्यवस्था और वरिष्‍ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। 1949 में हुई थी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना 1912 में क्विंग राजशाही का अंत हुआ और रिपब्लिक ऑफ चीन बना। यहीं से चीन का आधुनिक इतिहास शुरू हुआ। उस समय चीन को रिपब्लिक घोषित करने वाले नेशनलिस्ट नेता थे। इस दौरान वहां कम्युन...

कर्मचारियों के DA कटौती का आदेश वापस ले रही है मोदी सरकार? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई https://ift.tt/3ihDpLq

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के DA की कटौती का आदेश वापस ले लिया है। दावे के साथ एक आदेश की कॉपी भी वायरल हो रही है। ये आदेश 21 सितंबर का बताया जा रहा है। दरअसल, कोविड-19 लॉकडाउन के चलते हुई आर्थिक सुस्ती को देखते हुए मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की तीन अतिरिक्त किश्तों पर रोक लगाने का फैसला लिया था। केंद्र सरकार के इस फैसले का असर 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ा है। अब दावा किया जा रहा है कि ये आदेश वापस ले लिया गया है। और सच क्या है? इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली, जिससे पुष्टि होती हो कि केंद्र सरकार ने DA कटौती का आदेश वापस ले लिया है। वायरल हो रही चिट्‌ठी को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि ये DA कटौती वापस लेने का आदेश नहीं है। बल्कि, केंद्र सरकार में जनरल सेक्रेटरी डॉ. एम रघवैय्या द्वारा लिखा गया एक आवेदन पत्र है, जो कि वित्त मंत्री को लिखा गया है। इस पत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया गया है कि वे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को डियरनेस अल...