Skip to main content

6 फीट के जरूरी फासले हैं या मजबूरी के निशां, बड़ी अजीब लग रही लोगों को अपने बीच ये दूरी https://ift.tt/3cBZySQ

साल 2020 ऐसी धूमधाम से आया था कि लोग कह रहे थे ऐसा लीप ईयर सदियों में एक बार आता है। लेकिन, अब इसके 137 दिन बीतने के बाद यह सोच बन रही कि, कैसे भी हो ये साल जल्दी गुजर जाए और फिर लौटकर कभी न आए। वजह एक ही है- कोरोनावायरस।

इस वायरस ने दुनिया की तस्वीर और तौर तरीके ऐसे बदल दिए हैं जैसे कोई जादूगर किसी को सम्मोहित करके मनचाहा काम करा ले।कोरोना ने जो दुनिया में ऐसी दूरियां बड़ा दी और ऐसे फासले पैदा कर दिए हैं जिन्हें भरने में बरसों लग जाएंगे।

ऐसे ही फासलों की सबसे छोटी इकाई वह 6 फीट की दूरी है जो अब जिंदगी के साथ अनिवार्य रूप सेचलेगी।लॉकडाउन में ढील के साथ ही दुनिया में इस 6 फीट दूरी के अनोखे निशान सामने आ रहे हैं।

ये निशान मजबूरी के भी हैं और मजबूर करने वाले भी...इन्हींनिशानों की तस्वीरें और उनमें एक क्रिएटिविटी और बेबसीकी झलक

कोरोना से परेशान ब्रिटेन में जिंदगी पटरी पर आने की कोशिश कर रही है। उम्मीदे ऑक्सफोर्ड के टीके पर लगी है और इसी उम्मीद के बीच सड़कों पर पीले रंग से ऐसे निशान छाप दिए गए हैं।इन निशानों को पेवमेंट मार्कर्स कहा जाता है।लंदन के ग्रीनविच पार्क की है।

दुनिया में अपनी अनूठे वर्क-कल्चर और अनुशासन के लिए मशहूर सिंगापुर भी सहमा हुआ है। ये सुपर कनेक्टेड देश और इसके ग्लोबल सिटिजन अब खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। इसी अकेलेपन को दिखाती यहां के सुपरमार्केट की एक तस्वीर जिसमें टेप की मददसे खड़े लोगों के बीच 6 फीट की दूरीबना दी गई हैं।

द्वीपों के देश इंडोनेशिया में हालात अभी ज्यादा बिगड़े नहीं क्योंकि वैसे ही यहां पर पानी ने लोगों के बीच दूरियां बना रखी है। लोग अलग-अलग द्वीपों पर रहते हैं और पानी ही उन्हें आपस में जोड़ता है। लेकिन, अब काेरोना सबको और दूर कर रहा है। यहां की बड़ी इमारतों के इलेवेटर्स में अब ऐसे निशानों पर खड़े होकर नीचे से ऊपर जाने की मजबूरी है।

कला और आर्किटेक्ट के लिए मशहूर इटली के हर शहर ने कोरोना के कारण बड़े बुरे दिन देखे हैं। मौतों का सिलसिला कुछ थमा है तो अब जिंदगी फिर जोर लगा रही है, लेकिन अब उसमें करीबियां कम और दूरियां ज्यादा है। यहां के 16वीं सदी के मशहूर शही विसेंजा के एक मीटिंग हॉल में सीटों पर कोरोना वायरस कागजों में मुस्कुरा रहा है, मानों कह रहा है- अब फासलों से ही मिला करो।

साल 2020 के पहले लाल रंग का क्रॉस का निशान मौत का निशान माना जाता था। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि किसी रेस्तरां की सीटों पर ऐसे निशान देखने को मिलेंगे। दौड़ते-भागते हान्गकॉन्ग की सांसे कुछ थमी तो वहां के एक रेस्तरां में फासले बनाने के लिए ऐसे निशान बना दिए गए।

कोरोना ने जिंदगी को हाशिये पर ऐसे डाल दिया है कि जैसे हर पल मुश्किल से कटता है। इंतजार चाहे वैक्सीन बनने का हो या अपनों के पास सकुशल पहुंचने का, ये इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा। हां, इंतजार के इस दौर में इसके नए नाम और निशान जरूर देखने को मिल रहे हैं। थाइलैंड के एक बस स्टॉप पर सीटों के बीच फासला रखने के लिए कागज से ऐसे निशान बना दिए गए।

लॉकडाउन में ढील के बाद दुनियाभर में लोग भले ही काम पर लौट रहे हैं, लेकिन उनके मन अशांत हैं। एक धुकधुकी सी लगी है। ये मरने का भी डर है और नौकरी जाने का भी। जब लोग अपने दफ्तरों में लौट रहे हैं तो वहां के माहौल में अजीब सा एकाकीपन है और उसे बढ़ा रहे हैं अभी लगाए गए नए पोस्टर्स जिनमें लिखा है कि एक कमरे में सिर्फ दो कुर्सी लगाने की ही अनुमति है, इससे ज्यादा न लगाएं। तस्वीर अमेरिका के एक मशहूर आर्कटेक्ट फर्म के दफ्तर की है।

सोशल डिस्टेंसिंग के निशान बनाने के लिए अब न सतह देखी जा रही और न यह सोचा जा रहा कि लोग मानेंगे या नहीं। भीड़ भरी दिल्ली के एक मॉल में एस्कलेटर सीढ़ियों पर दो पायदान छोड़कर बनाए ये निशान कह रहे हैं कि अबदिलवालों के इस शहर में दूरी बनाकर रखने में ही समझदारी है।

किसी मॉल, दफ्तर या पब्लिक प्लेस के वॉशरूम में ऐसे निशान दिखने में भले ही अजीब लग रहे हों, लेकिन अब सच्चाई यही है। आप इतनी जल्दी चीजों को बदल तो नहीं सकते, लेकिन क्रॉस के निशान का इस्तेमाल करके लोगों के बीच दूरी तो बनाई ही जा सकती है। सिंगापुर की एक इमारत के वॉशरूम में 6 फीट की दूरी के लिए लगाए गए ये लाल निशान कुछ ऐसा ही कह रहे हैं।

सड़क पर मिलने वाले फास्ट फूड का ये अमेरिकी रूप है जिसमें लोग फूड ट्रकों के आगे खड़े होकर ढेरों हॉट डॉग्स, सैंडविच, पिज्जा हजम कर जाते थे। पर, अब थोड़ी मुश्किल होगी क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर एक लम्बी लकीर आपकी भूख और तड़प को कम कर देगी। तस्वीर न्यूजर्सी के बे-एरिया की है।

दुकान में सामान है, लेकिन जगह नहीं क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग रखनी है। ऐसे में दुकानदार ने ये तरीका निकाला और निवेदन करते हुए लिखा कि हम आपकी इतनी ही सेवा कर सकते हैं। ग्राहकों को मानना पड़ा और ट्रॉली लिए घंटों खड़े भी रहे। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्टेट के ये तस्वीर अब आगे की भी हकीकत बनने वाली है।

कभी खेल के मैदान और ट्रैफिक संभालने के काम आने वाले इन कोन का ऐसा उपयोग किसी ने न सोचा होगा। तस्वीर अमेरिका के विस्कोंसिन स्टेट की है जहां स्टेट प्रेसिडेंशिल प्राइमरी इलेक्शन में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के लिए ऐसा किया गया। यह बात अलग है कि इस दौरान 71 लोग कोरोना पॉजिटिव हो गए।

कोरोना ने महज 100 दिनों में दुनिया में इनोवेशन की दिशा ही पलट दी है। मार्केट और कंपनियों को फोकस जान बचाने वाले आइडियाज पर है और ऐसे प्रोडक्ट की डिमांड है जिससे सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन की जा सकी। तस्वीर इटली के एक पार्क की है जहां सेन्ट्रो बेंजिनी कंपनी के बनाए फाइबर के रैकेट नुमा घेरे में बैठे लोग।

आखिर में तस्वीर भारत की। ऐसे दृश्य देश में लगभग हर जगह देखने को मिल रहे हैं। सफेद गोलों में जैसे उम्मीदें कैद होकर रह गई हैं। गरीबी, दुश्वारी और मजबूरियां पहले ही कम नहीं थी कि कोरोना और आ गया। देश के इन हालातों में सोशल डिस्टेंसिंग शब्द सुनने में तो अच्छा लगता है लेकिन जब उसके सामने जमीन सच्चाईयां आती हैं तो सारी समझ और अनुशासन धरा का धरा रह जाता है।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
After covid-19 the pictures of social distancing around the world| Changes in the manner of social distancing of 6 feet, this distance between people feeling very strange


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2Z9NwMt

Comments

Popular posts from this blog

Who is Nicole Osbourne? Inside Anthony Joshua’s split and co-parenting https://ift.tt/jrKHYQR

Boxer Anthony Joshua's personal life draws attention. His son's mother, Nicole Osbourne, a dancer and yoga instructor, shares co-parenting duties. They maintain a respectful relationship focused on their son Joseph. Joshua's career demands often kept him away, contributing to their split. He remains dedicated to fatherhood amidst ongoing boxing discussions. from Times of India https://ift.tt/IxmCXUE