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संक्रमित बोले- पड़ोसी आतंकी जैसा समझने लगे हैं, घर का रास्ता ब्लॉक कर दिया, दवा-किराना रोक दिया https://ift.tt/2LuD5eq

हरफोन कॉल पर सरकार की तरफ से कोरोना को लेकर दी जा रही सुरक्षात्मक चेतावनी, ''कोरोना से दूर रहना, कोरोना मरीजों से नहीं'' इंदौर के लोगों के लिए सिर्फ सुनने के लिए रह गई है। मध्यप्रदेश के इंदौर में कोरोना संक्रमितों के साथसामाजिक बहिष्कार, तिरस्कार की सूचनाएं मिली हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं कि इंदौरी होने पर शर्म आ जाए।

शहर में अबतक 2299 कोरोना के मरीज मिले हैं, हजारों में लक्षण और सैकड़ों लोगों को सतर्कता बरते हुए आइसोलेट कर दिया है। लेकिन, इस तरह की खबरों ने इंसानियतपर सवाल उठा दिए हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें आतंकी जैसा समझा जाने लगा है। घर का रास्ता ब्लॉक कर दिया, दवा और किराने पर रोक लगा दी गई है।ऐसे में सामाजिक वैमनस्य रोकने के लिएदैनिक भास्कर लोगों से अपील करता है कि पॉजिटिव हैं, पराए नहीं; इन्हें दूर से संभालिए।

मुरलीधर नीमा: ऐसे देखने लगे जैसे कोई अपराध कर दिया हो

ये हैं मून पैलेस निवासी 55 वर्षीय व्यापारी मुरलीधर नीमा। कहते हैं- कोरोना हुआ तो लोगों को लगा जैसे मैंने अपराध कर दिया हो। मैं आतंकवादी हूं। सभी नहीं लेकिन, कुछ मुझे और परिवार को हीन भावना से देखने लगे। चाहते हैं हम लोग कॉलोनी छोड़कर चले जाएं।

सौरभ तिवारी: डिलीवरी बॉय दवा देने आया, वापस भेज दिया

ये हैं मधुबन कॉलोनी निवासी सौरभ तिवारी।

वह कहते हैं बुआ और पापा के कोरोना पॉजिटिव होते ही लोगों ने टेंट लगाकर हमारे घर आने के रास्ते बंद कर दिए। दूध, कचरा गाड़ी वाले को नहीं आने दिया। ऑनलाइन दवाई मंगवाई, पर डिलीवरी बॉय को आने नहीं दिया।

श्वेता सिंघल: किराना मंगाया तो देने से मना कर दिया

ये हैं मनीष बाग निवासी श्वेता सिंघल।

वह कहती हैं परिवार के तीन सदस्य पॉजिटिव निकले। किराना मंगाया तो डिलीवरी बॉय ने इनकार कर दिया। कहने लगा कि दूसरे ग्राहकों को पता लगा कि हमने मनीष बाग में डिलीवरी दी है तो सामान नहीं खरीदेंगे।

अंकित नीमा : बीमारी तो ठीक हो गई, सबकी सोच कैसे ठीक होगी

ये हैं अहिल्यापुरी निवासी अंकित नीमा।

वह कहते हैं कोरोना का इलाज कराने के बाद 6 मई को डिस्चार्ज हुआ। होम आइसोलेट हूं। पड़ोस में मेरे बारे में पता चलने के बाद लोगों के व्यवहार बदल गए। बीमारी का तो इलाज हो गया, लेकिन समाज की सोच कब ठीक होगी।

हर्षिता जोशी : किराना और फल- सब्जियां ही मिलना बंद हो गईं

ये हैं नेहरू नगर निवासी हर्षिता जोशी।

वह कहती हैं मैं कोरोना से तो ठीक हो गई, लेकिन अब कोई मदद करने को तैयार नहीं है। निगम की कचरा गाड़ी तक नहीं आ रही है। तीन बोरी कचरा जमा हो गया। किराना सामान, फल और सब्जियां कुछ नहीं मिल पा रहा है।

रवींद्र सिंह होरा : घर के दोनों रास्ते बंद कर दिए, चेहरा देखते ही मुंह फेरने लगे

ये हैं स्कीम 103 निवासी रवींद्र सिंह होरा।

वह कहते हैं इलाज के बाद 30 अप्रैल को छुट्टी हुई। घर के दोनों रास्ते पड़ोसियों ने बंद कर दिए। नजरें मिलती है तो चेहरा फेर लेते हैं। घर के सामने से निकलना बंद कर दिया।

(अगर आपके आसपास भी ऐसा कुछ घटा हो तो बताएं। मरीज को संबल देने के अच्छे उदाहरण भी बताइए-9406666652)



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मून पैलेस निवासी 55 वर्षीय व्यापारी मुरलीधर नीमा।


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