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जीवन अच्छे भविष्य की कामना के साथ जिया जाना चाहिए, लेकिन इसके बीच मौजूदा वक्त को जीना भूलना नहीं चाहिए https://ift.tt/2MfBAB0

सबसे अच्छा जीवन तभी जिया जा सकता है, जब हम हरदम इसे ज्यादा से ज्यादा सरल बनाने की कोशिश में ना लगे रहें। जीवन में वह समय भी आता है, जब जवाबों को खोजने की ज़रूरत पड़ती है और कभी ऐसा वक्त भी आता है जब सवालों को उसी स्थिति में छोड़ देना ही बेहतर हो जाता है।

अगर हर जवाब अगले सवाल का कारण बन जाए या हर जवाब के साथ सवाल भी बढ़ते जाएं तो फिर यह उलझनें, मानसिक अशांति और जीवन में मौजूद यह शोर कभी ख़त्म नहीं होने वाला। और अगर ज़िंदगी इन्हीं उलझनों और त्रास में फंसी रही, तो जीवन के असली आनंद को महसूस करने से हम वंचित रह जाएंगे। इसलिए ‘कार्पे डियम्’ यानी कल की चिंता छोड़कर इस पल को भरपूर जिएं। इस क्षण को महसूस कीजिए और पूरे आनंद से अपना जीवन जिएं।

हमारे ज्ञान, असीमित बुद्धिमत्ता से भी हम जीवन के बारे में कुछ खास नहीं समझ सकते। आप जीवन के सार को खोजने के लिए भले ही हर संभव प्रयास करते हैं, वह सब कुछ करने की कोशिश करते हैं, जो वाकई में किया जा सकता है, जो आपके दायरे में है, लेकिन आप देखेंगे कि वह भी अपर्याप्त जान पड़ेगा।

निर्वाण, मोक्ष या ठहराव तो दरअसल जीवन के विरोधाभासों को संतुलित करने से ही मिलेगा। जीवन-मृत्यु, लेना-देना, आत्मकेंद्रित या जुड़े रहना, साम्य या बिखराव...सारा जीवन ही विरोधाभासों से भरा हुआ है।
सवाल है कि इन सब विरोधाभासों के भंवर में बीच का रास्ता कैसे मिले।

इन सब उलझनों और विरोधाभासों के बीच झूलते हुए, ज़िंदगी में सबकुछ हासिल करने के बाद भी महसूस होता है कि जैसे हमें जीवन का मूल ही समझ नहीं आया, लगता है कि आज भी वहीं खड़े हैं, जहां से शुरुआत हुई थी। आप इस खोज में जीवन की दौड़ में भागे जा रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि इस जीवन के अंतिम पड़ाव से भी आगे कोई नहीं शुरुआत है।

जहां से शुरू किया था, वहीं फिर से वापस आने के लिए आप भागे जा रहे हैं। जैसे कि महान दार्शनिक उमर खय्याम ने कहा था- ‘मैं उसी दरवाज़े से बाहर आया हूं जिससे मैं भीतर गया था।’इस दुनिया की आपसे अपेक्षाएं, दुनिया से आपकी अपेक्षाएं, खुद की खुद से उम्मीदें असीम हैं, अनंत हैं, इनका कोई ओर-छोर नहीं है। ये उम्मीदें फिर उसी मानसिक अशांति को ओर ले जाएंगी। सवाल है कि क्या यह वाकई उतना मायने रखता है? सवाल यह भी है कि जीवन का मकसद क्या है?

फिलहाल एक काम कीजिए- एक गहरी श्वास लीजिए और धीरे सेे कहिए ‘कार्पे डियम्’ यानी भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान को भरपूर जिएं।हां, यह बात बिल्कुल ठीक है कि सुनहरे भविष्य की कल्पना करना बुरा नहीं है। जीवन अच्छे भविष्य की कामना के साथ भी जिया जाना चाहिए, लेकिन इस सब में मौजूदा वक्त, इस क्षण को जीना भूलना नहीं चाहिए।

हमें इस क्षण को भी महसूस करना शुरू करना होगा। अभी मुस्कराइए, क्योंकि खुशी-प्रसन्नता इसी क्षण में है, जो सुखद अनुभूति सामने घट रही है, उसे महसूस करके प्रसन्न होइए। भविष्य कल घटित होगा। यह क्षण सामने है और अभी है। खुशी चेहरे पर आने से, मुस्कराहटों को होंठों पर आने से मत रोकिए।

आंसू हैं तो उनको भी बहने दीजिए। भावनाओं को मत रोकिए। जो कुछ होगा इसी क्षण में घटित होगा, होने दीजिए। अब फिर से एक गहरी सांस लीजिए। चेहरे पर कोई तनाव मत लाइए, रिलेक्स कीजिए और खुद को हल्का महसूस कीजिए।

आइए जीवन के हर क्षण को महत्वपूर्ण बनाएं। इस क्षण के लिए सजग, जीवंत और सचेत हो जाएं। भले ही आपने ज़िंदगी बहुत अच्छी गुजारी हो या जीवन अभावों में गुजरा हो, जिंदगी के खेल के बाद जाना सबको एक ही जगह होता है। हम अपने साथ जो करते हैं, वही हमारे साथ जाता है और जो दूसरों के लिए करते हैं वह सब यहीं, इस दुनिया में रह जाता है।हर क्षण के बाद अगला क्षण आएगा इसलिए हर क्षण को उपयोगी बनाएं, हर क्षण जीवन की पूर्णता के साथ जिएं और इस जीवन को जीवंत बनाएं।



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