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कोरोना पीड़ितों को लैब में विकसित सेल्स से ठीक करने की तैयारी, गंभीर मरीजों पर बिना साइड इफेक्ट प्रयोग सफल https://ift.tt/2z0quNj

शोधकर्ता कोरोना के मरीजों का इलाज हार्ट सेल थैरेपी से करने की तैयारी कर रहे हैं। इस थैरेपी में लैब में विकसित हार्ट कोशिकाओं को मरीज के शरीर में इंजेक्ट किया है। कोरोना से मरने वाले ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा है जिनके शरीर में सूजन देखी गई थी। हार्ट सेल थैरेपी का इस्तेमाल इसी अतिरिक्त सूजन को कम करने के लिए किया जा रहा है।

शुरुआती प्रयोग में इससे कुछ संक्रमित रिकवर हुए हैं और परिणाम बेहतर आए हैं, जिसके बाद कहा जा रहा है कि अब इसकाबड़े स्तर पर ट्रायल किया जाएगा।

मरीज वेंटिलेटर पर थे, 3 हफ्ते में ठीक हो गए
जर्नल बेसिक रिसर्च इन कार्डियोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कोरोना के 6 मरीज सांस लेने की तकलीफ से जूझ रहे थे। उन्हें ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। इस थैरेपी को लेने के वाले पांच मरीज वेंटिलेटर पर थे और हालत में भीसुधार दिखा। वहीं, एक अन्य मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी। थैरेपी के तीन हफ्ते बाद सभी मरीजों को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

थैरेपी कितनी सुरक्षित, यह पता लगाएंगे

यह प्रयोग अमेरिका के सेडार-सिनाई मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मरीजों में परिणाम बेहतर दिखे हैं लेकिन यह थैरेपी कोरोना पीड़ितों के लिए कितनी सुरक्षित है, इसका पता लगाया जाना बाकी है। हालांकि रिसर्च के अंत तक कोरोना के मरीजों में इस थैरेपी का कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखा।

क्या है हार्ट सेल थैरेपी

इस थैरेपी को CAP-1002 भी कहते हैं, जिसमें कार्डियोस्फियर-डेराइव्ड सेल्स का प्रयोग किया जाता है। ये कोशिकाएं लैब में इंसानी हृदय के ऊतकों (टिशू) से विकसित की जाती हैं। शुरुआत में इस थैरेपी का प्रयोग हार्ट फेल्योर के मरीजों पर किया जाता था बाद में यह पूरे शरीर के लिए मददगार साबित हुई।

ये कोशिकाएं इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद

शोधकर्ता डुआर्डो मार्बन के मुताबिक, रिसर्च में देखा गया है कि कार्डियोस्फियर-डेराइव्ड सेल्स शरीर के इम्यून सिस्टम के लिए काफी फायदेमंद हैं और कई बीमारियों में सूजन को घटाने का काम करती हैं। ये कोशिकाएं खास तरह के एक्सोसोम्स को रिलीज करती हैं जो पूरे शरीर में घूमते रहते हैं और असर दिखाते हैं।

बड़े स्तर पर ट्रायल की तैयारी

शोधकर्ता राज मक्कड़ के मुताबिक, रिसर्च टीम अब बड़े स्तर पर इस थैरेपी का ट्रायल करने की तैयारी कर रही है। अगले ट्रायल में शामिल होने वाले कोरोना पीड़ितों को दो समूह में रखा जाएगा। पहले समूह में वो मरीज रहेंगे जिनहें थैरेपी दी जाएगी और दूसरे समूह में शामिल मरीजों का सामान्य इलाज चलेगा। ऐसा करके नई चुनौतियों के सामनेइस थैरेपी के असर को और भी बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।



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Preparation to fix Corona patients by developing cells in lab, experimentation on serious patients was successful


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