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पहले दो कैडेट्स के बीच 0.5 मीटर की दूरी होती थी इस बार 2 मीटर होगी, हाथ में ग्लव्ज और चेहरे पर मास्क होगा https://ift.tt/3cScYcA

'कोरोना वायरस की वजह से हम सब सोच रहे थे कि पासिंग आउट परेड होगी या नहीं, लेकिन बाद में सेना ने तय किया कि कोविड-19 से सावधानी बरतते हुए पासिंग आउट परेड कराई जाएगी। हमें बताया गया कि परेड की लाइव स्ट्रीमिंग डीडी नेशनल और यूट्यूब चैनल पर की जाएगी। इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी।'यह कहना है भोपाल के अनुज दुबे का,जो भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में एक साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंटबन जाएंगे।वह 13 जून यानी शनिवार को आईएमए की पासिंग आउट परेड में भाग लेंगे।

उन्होंने फोन पर बताया,'परेड के लिए पहले 10 ग्रुप बनाए जाते थे और दो कैडेट्स के बीच 0.5 मीटर की दूरी होती थी, लेकिन इस बार दो कैडेट्स के बीच में 2 मीटर की दूरी होगी। हर कैडेट के चेहरे पर मास्क और हाथों में ग्लब्स होगा। ग्रुप पर भी घटाकर 8 कर दिए गए हैं।' आईएमए के 87 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब कैडेट की इस परेड में उनके मात-पिता शामिल नहीं हो पाएंगे।

अनुज ने कहा- इस बात की खुशी है कि मां मुझे टीवी पर देख पाएंगी

भास्कर से बातचीत में अनुज ने कहा, 'मुझे चार साल से जिस क्षण का बेसब्री से इंतजार था कि मां आएंगी और सेना की वर्दी में मेरे दोनों कंधों पर दो-दो सितारे जड़ देंगी। अब ये सपना पूरा नहीं हो पाएगा, लेकिन इस बात की खुशी है कि मां पासिंग आउट परेड में मुझे परिवार के साथ टीवी पर लाइव देख पाएंगी।'

अनुज दुबे का चयन यूपीएससी से एनडीए खड़गवासला के लिए हुआ था। फोटो पिछले साल हुए कन्वाेकेशन की है। जब अनुज ने 3 साल का कोर्स पूरा किया था। तब उनके माता-पिता भी वहां गए थे।

अनुज ने कहा,'मां-पापा नहीं आ पाएंगे, इसका थोड़ा मलाल है, लेकिन हमारे अफसर और मैडम हमारे कंधों पर सितारे टांक देंगे। घर से दूर हमारी दूसरी फैमिली वह भी तो है। मां कोरोना वायरस की वजह से नहीं आ पाएंगी।लेकिन इस वक्त मां का घर पर होना ही अच्छा है। वह सेफ हैं। मुझे टीवी पर पापा, भाभी और भइया के साथ बैठकर देख पाएंगी।'

भोपाल के लिए गर्व का मौका
भोपाल के अनुज दुबे इस परेड के बाद सेना की आर्टिलरी रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट बन जाएंगे। भोपाल और मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है कि एक साल में ही गुलमोहर कालोनी में रहने वाले दुबे परिवार ने दो अफसर सेना को दिए हैं। अनुपम और मंजू दुबे के बेटे अनुज के पहले अभिलाष दुबे के बेटे आदित्य भी सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट्स में लेफ़्टिनेंट बने हैं। वह इस समय सिक्किम में तैनात हैं।

अनुज दुबे, अपने चचेरे भाई आदित्य दुबे और मां के साथ। आदित्य (बाएं से दूसरे) भी आर्टिलरी रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट हैं और इस समय सिक्किम में पोस्टेड हैं।

'मैं भइया और खुद के सपने को जी रहा हूं'
शनिवार से सेना में लेफ्टिनेंट बनने वाले अनुज दुबे को शुरू से ही सेना का जुनून था। इसमें सबसे बड़ा योगदान उनके भाई अंकुर दुबे का रहा। अनुज कहते हैं, 'भइया को सेना से बहुत लगाव है और हम दोनों सेना से जुड़ी फिल्में साथ में देखते थे, बॉर्डर, एलओसी जैसी फिल्में कई बार देखी हैं। वह मुझसे अक्सर कहा करते थे, तुम्हें सेना में अफसर बनना है। वहीं से मुझे सेना में जाने का जुनून पैदा हो गया।'

अनुज आगे कहते हैं, 'फिर मैंने सेना में अफसर बनने के बारे में जानकारी निकालनी शुरू की, देहरादून की आईएमए के बारे में पता चला। मैं यूपीएससी से एनडीए, खड़गवासला (महाराष्ट्र)के लिए सिलेक्ट हुआ। मसूरी में मेरा एसएसबी टेस्ट हुआ और मैं चुना गया। तीन साल के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खड़गवासला (एनडीए) में ही रहा। यहां पर सेना की ट्रेनिंग और कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन साथ-साथ पूरा किया। इसके बाद एक साल के लिए देहरादून आईएमए भेज दिया गया।'

अनुज अपनी मां अंजू दुबे और बड़े भाई अंकुर दुबे के साथ। अनुज अपने बड़े भाई को अपना प्रेरणास्रोत बताते हैं।

सियाचिन में तैनाती मिलना सपने के पूरे होने जैसा
अनुज को पासिंग आउट परेड के 24 घंटे के अंदर सीधे सियाचिन में तैनाती दी जा रही है। अनुज ने बताया, 'सियाचिन में पहली पोस्टिंग उनके लिए सपने के पूरा होने जैसा है। बचपन से सुनता आ रहा था कि सियाचिन में सेना तैनात की जाती है। मैं भी गूगल करके सिचाचिन के बारे में जानकारी लेता था। अब उसी ड्रीम प्लेस में मुझे पोस्टिंग मिल रही है। इसे लेकर बहुत एक्साइटेड हूं।'

दुनिया के सबसे ऊंचे क्षेत्र और माइनस में टेंपरेचर वाली जगह पर कैसे तालमेल बिठाएंगे? इस सवाल के जवाब में अनुज कहते हैं, 'ट्रेनिंग के दौरान हमें शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया जाता है, फिर वहां जाने के बाद हफ्तेभर उस वातावरण में ढाला जाता है। मुझे उम्मीद है कि मैं बहुत जल्दी उस वातावरण में ढल जाऊंगा और फिर ऊंचाई पर बर्फ में ड्यूटी भी लगाई जाएगी।'

मां ने तैयार कर लिया था गुजिया और खुरमे
अनुज की मां अंजू दुबे को भी इस बात से निराशा है किवह बेटे की पासिंग आउट परेड में शामिल नहीं हो पाएंगी, लेकिन उसे टीवी पर देखेंगी, इस बात की खुशी भी है। अंजू दुबे ने हमें बताया, 'जनवरी में अनुज घर आया था, इसके बाद हम मार्च में होली पर उससे मिलने जाने वाले थे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण नहीं जा पाए और फिर लॉकडाउन हो गया। हमने सोचा था लॉकडाउन खुलेगा और पासआउट परेड में जा सकेंगे। लेकिन येभी नहीं हो पाया। अनुज खाने-पीने और कपड़ों का शौकीन है। इसलिए मैंने उसकी फेवरेट गुझिया और खुरमे बना लिए थे। आज ही बात हुई है। पहले मैं समझाती थी, वो सुनता था। अब मैं चिंता करती हूं तो कहता है मां फिक्र मत करो, मैं हूं ना।'

अनुज दुबे भाई आदित्य दुबे और उनकी मां के साथ फुरसत के क्षण में। दोनों भाई अच्छे दोस्त भी हैं और फोटो खड़गवासला की है, जहां पर दोनों ने करीब दो साल साथ बिताए हैं।

कोरोनावायरस ने बदला तौर-तरीका
आम तौर पर सेना में पासिंग आउट परेड के बाद अफसरों को 15-20 दिन की छुट्टी दी जाती है, जिससे वह अपने परिवार से मिल सकें। इसके बाद ड्यूटी पर भेजा जाता था, लेकिन कोरोना वायरस के चलते इस बार आईएमए से पास आउट हो रहे करीब 400 कैडेट को अफसर बनने के 24 घंटे के अंदर तैनाती दी जा रही है।

अनुज ने बताया कि कुछ राज्यों में लॉकडाउन खुल गया है, लेकिन कुछ जगह अब भी लॉकडाउन है। कुछ अफसरों को छुट्टी दी जाती और कुछ को नहीं। ये ठीक नहीं होता, इसलिए सभी को एक साथ पोस्टिंग दी जा रही है। सेना का मानना है कि हम यहां पर सुरक्षित माहौल में हैं और पोस्टिंग के बाद भी सुरक्षित रहेंगे। छुट्टी के बाद ट्रैवल करना सेफ नहीं है।

कोविड ने सेना कीट्रेनिंग का तरीका बदला
अनुज नेबताया, 'लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से ही आईएमए में ट्रेनिंग का तरीका बदल गया। मार्च से हमें कमरे से बाहर निकलने पर हर वक्त मास्क लगाना और सैनिटाइजर साथ में रखना अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद हम मैदान में फिजिकल ट्रेनिंग के लिए आते तो किसी भी चीज को टच करने पर पाबंदी लगा दी गई।

हमें केवल खुद से दौड़ना, पुशअप्स और अन्य एक्सरसाइज कराई जाने लगी। इसमें भी दूरी बनाकर रखनी होती थी। हालांकि, इस दौरान कोऑर्डिनेशन में परेशानी आई। इसके साथ ही ग्रुप में कमरों में होने वाली पढ़ाई को भी बंद कर दिया गया। 60-70 की जगह 20-30 कैडेट्स के ग्रुप बनाए गए और बाकी पढ़ाई अपनी बिल्डिंग में ही करनी पड़ी।'



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भोपाल के अनुज दुबे शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में पासिंग आउट परेड में शामिल होंगे। इसके बाद वह सेना में लेफ्टिनेंट बन जाएंगे।


from Dainik Bhaskar /national/news/passing-out-parade-pop-indian-military-academy-ima-latest-news-updates-on-bhopal-anuj-dubey-127404610.html

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