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पश्चिमी देशों के कोरोना हॉटस्पॉट में टेस्ट के लिए लोग नहीं मिल रहे, चीन के बाद अमेरिका और यूके में ये नई परेशानी https://ift.tt/3gSAc5G

वैक्सीन ट्रायल की रेस में लगे वैज्ञानिकों को कोरोना हॉटस्पॉट में ऐसे लोगों की तलाश है जो वॉलेंटियर बन सके। अमेरिका और यूरोप के वैज्ञानिकों का कहना है कि सख्ती से लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग लागू होने के बाद मामलों में कमी आई है। ऐसे मेंअब यहां वैक्सीन ट्रायल केलिए हॉटस्पॉट की कमी होतीजा रही है।

चीन से भी तीनदिन पहले ऐसी ही खबर मिली थी किवहां भी पर्याप्त संख्या में वॉलेंटियर नहीं मिल रहे।संभावना है किटेस्टिंग के लिए पश्चिमी देशों केवैज्ञानिक अफ्रीका और लेटिन अमेरिका जा सकते हैं।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

  • अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डायरेक्टर फ्रांसिस कोलिंस का कहना है कि यह अजब स्थिति है, अगर हम कोरोना हॉटस्पॉट में बचाव के तरीके अपनाकर संक्रमणघटा रहेहैं तो परीक्षण करना कठिन हो जाएगा।
  • ब्रिटेन के वारविक बिजनेस स्कूल की ड्रग एक्सपर्ट आयफर अली का कहना है कि लोगों का ट्रायल में शामिल होना जरूरी है, ऐसे में संक्रमण का रिस्क लेना होगा। अगर कोरोनावायरस अस्थायी तौर पर खत्म हो गया तो पूरी मेहनत व्यर्थ हो जाएगी। ऐसी स्थिति में ट्रायल उन क्षेत्रों में शिफ्ट करना होगा, जहां कम्युनिटी संक्रमण के मामले दिख रहे हैं, जैसे ब्राजील और मैक्सिको।

ऐसाइबोला के समय भी हुआ था
कोरोना के मामले ब्रिटेन, यूरोप और अमेरिका में अधिक थे, अब संक्रमण फैलने की दर गिर रही है। ट्रायल के लिए पर्याप्त मरीज नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति 2014 में इबोला के समय भी पश्चिमी अफ्रीका में बनी थी। वैक्सीन महामारी के अंतिम दौर में तैयार हुई थी और टेस्टिंग के लिए मरीज नहीं मिल रहे थे।

अब आगे क्या
अमेरिकी कम्पनी मॉडर्मा और ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को दूसरे चरण का ट्रायल करना है। अमेरिका जुलाई में 20 हजार से 30 हजार लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल करेगा। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डायरेक्टर फ्रांसिस कोलिंस के मुताबिक, अगर यहां तेजी से मामले गिरते हैं तो ट्रायल के लिए दूसरे देशों का रुख करना होगा। अमेरिकी सरकार पहले भी अफ्रीका में एचआईवी, मलेरिया और टीबी की वैक्सीन का ट्रायल कर चुकी है।

रोकना पड़ सकता है ट्रायल
प्रोफेसर कोलिंसके मुताबिक, अफ्रीका में कोरोना के मामले काफी बढ़रहे हैं। हम वहां ट्रायल के लिए जा सकते हैं और नई जानकारी सामने ला सकते हैं। वैक्सीन तैयार करने वाले ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े जेनर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टहडर एड्रियन हिल का कहना है कि ट्रायल के लिए 10 हजार लोगों की जरूरत है।

ब्रिटेन में मामले घटने के कारण पर्याप्त लोग नहीं मिले तो ट्रायल रोकना पड़ सकता है।

कैसे होता है वैक्सीन का ट्रायल

  • वैक्सीन ट्रायल में शामिल होने वाले लोगों को रेंडमली दो समूहों में बांटा जाता है- ट्रीटमेंट ग्रुप और कंट्रोल ग्रुप। ट्रीटमेंट ग्रुप पर वैक्सीन का ट्रायल होता है। कंट्रोल ग्रुप को सामान्य इलाज दिया जाता है।
  • सभी प्रतिभागियों को कोरोना प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाता है। इसके बाद इनमें संक्रमण होने की दर का मिलान किया जाता है। ट्रीटमेंट ग्रुप को वैक्सीन दी जाती है। अगर कंट्रोल ग्रुप में संक्रमण गंभीर रूप ले रहा है तो इसका मतलब है दूसरे ग्रुप में वैक्सीन का असर हो रहा है।


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Corona hotspots not available for vaccine trials, now preparing for testing in Mexico and Brazil, community infection centers


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