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अगर हर बच्ची 10वीं तक भी पढ़ ले तो 2050 में दुनिया की आबादी 150 करोड़ तक कम होगी, क्योंकि शिक्षा लड़कियों को परिवार नियोजन की समझ देती है https://ift.tt/3fnCkBa

ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की रिपोर्ट के अनुसार, लड़कियों की शिक्षा और जन्म दर के बीच गहरा संबंध है, क्योंकि शिक्षा लड़कियों को परिवार नियोजन की समझ देती है। साथ ही शिक्षा उन्हें बाल विवाह व कच्ची उम्र में मां बनने से भी बचाती है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वर्ल्ड पॉपुलेशन एंड ह्यूमन केपिटल इन ट्वेंटी फर्स्ट सेंचूरी स्टडी के अनुसार, हर लड़की और लड़के को 10वीं तक नियमित शिक्षा मिले तो 2050 में दुनिया की आबादी 150 करोड़ कम के स्तर पर होगी। यूएन के अनुसार 2050 में दुनिया की आबादी 980 करोड़ होगी।

दुनिया का उदाहरण

  • अफ्रीका में महिला शिक्षा की सुविधाएं न्यूनतम हैं, वहां हर महिला औसतन 5.4 बच्चों को जन्म दे रही है। जबकि जिन देशों में लड़कियों को 10वीं तक शिक्षा मिल रही है, वहां हर महिला 2.7 बच्चों को जन्म दे रही है। लड़कियों के लिए जहां कॉलेज तक शिक्षा सुविधाएं हैं, वहां 1 महिला औसतन 2.2 बच्चों को जन्म दे रही है।

देश का उदाहरण

  • यही ट्रेंड भारत में है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रति हजार पर सबसे कम जन्मदर केरल में 13.9 है। तमिलनाडु में जन्मदर 14.7 है। ये राज्य बच्चियों की पढ़ाई में भी आगे हैं। 2011 में महिला साक्षरता में सबसे पिछड़े तीन राज्यों राजस्थान (52.7), बिहार (53.3), उत्तर प्रदेश (59.5) थे। राजस्थान में जन्मदर 23.2, बिहार में 25.8 व उत्तर प्रदेश में 24.8 है।

बीते दो सौ साल में इन बड़ी चुनौतियों को इंसान ने हल किया

साक्षरता: 406 करोड़ बच्चों की शिक्षा का इंतजाम किया
18वीं सदी के आरंभ में जब आबादी तेजी से बढ़नी शुरू हुई, तब हालात ये थे कि 100 में से 83 बच्चाें के लिए शिक्षा की कोई सुविधाएं नहीं थी। ये बच्चे साक्षर तक नहीं हो पाते थे। 100 करोड़ की आबादी में तब सिर्फ 10 करोड़ लोग साक्षर थे। थोड़ा सुधार हुआ तो 1930 में 15 साल से अधिक उम्र का हर तीसरा व्यक्ति साक्षर होने लगा। अब दुनिया में 86% लोग साक्षर हैं। आज दुनिया में 15 साल से अधिक उम्र के लाेगों की आबादी 504 करोड़ है। इनमें से करीब 85% यानी 406 करोड़ लोग साक्षर हैं।

गरीबी: 94% लोगों को बेहद गरीबी से निकाला
1820 तक एक छोटे-से वर्ग को सुखी जीवन की सुविधाएं हासिल थीं। 100 में सिर्फ 6 लोग अच्छा जीवन जी रहे थे। बाकी 94% लोग बेहद गरीब थे। 1950 में दुनिया के दो-तिहाई लोग बेहद गरीब थे। जबकि 1981 में यह आंकड़ा घटकर 42% हो गया। 2015 में बेहद गरीब आबादी 10% से नीचे आ गई। इसे बीते 200 सालों की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा जाता है। यूएन के मुताबिक, इन दो सौ सालों में दुनिया ने आबादी के 94% हिस्से को गरीबी से बाहर निकाला है।

आजादी: 1% लोग लोकतंत्र में रहते थे, अब 56% रहते हैं
1820 तक 100 में से सिर्फ एक व्यक्ति लोकतांत्रिक देश में जन्म लेता था। आज दुनिया के 56% लोग लोकतांत्रिक देशों में रह रहे हैं। 19वीं शताब्दी में जनसंख्या का एक तिहाई से अधिक हिस्सा औपनिवेशिक शासन में रहता था और लगभग सभी अन्य लोग राजशाही या तानाशाही वाले देशों में रहते थे। 20वीं सदी में दुनिया काफी बदल गई। औपनिवेशिक साम्राज्य समाप्त हो गए और अधिक से अधिक देश लोकतांत्रिक हो गए। दुनिया में लोकतांत्रिक आबादी की संख्या लगातार बढ़ रही है।

अभी 13 वर्ष में आबादी सौ करोड़ बढ़ रही है, आगे 20 वर्ष लगेंगे
आबादी का विस्तार थमेगा कहां?
दुनिया की आबादी 700 से 800 करोड़ होने में 13 (वर्ष 2023) साल लगेंगे। 800 से 900 करोड़ होने में 14 (वर्ष 2037) साल लगेंगे। जनसंख्या वृद्धि दर घट रही है इसलिए 900 करोड़ से 1000 करोड़ होने में 20 (वर्ष 2057) साल का वक्त लगेगा।

दुनिया में अब तक कितने जन्म हुए हैं?
10 हजार800 करोड़ःलोग अब तक दुनिया में पैदा हो चुके हैं और मौजूदा आबादी 707 करोड़ इसका सिर्फ 6.5% है।

हमारी औसत उम्र और कितनी बढ़ेगी?

  • 2045 तक उम्र 6 साल और बढ़ जाएगी। 25 साल बाद इंसान की औसत उम्र 77 साल होगी।
  • 2100 में यह 83 साल हो जाएगी। अभी दुनिया में औसत उम्र 71 वर्ष है। 2000 में 67 साल थी।

हर जन्म से धरती पर कितना असर?
हर अमेरिकी बच्चा अपने पूरे जीवन में वातावरण में 10 हजार मीट्रिक टन सीओ2 बढ़ाता है। किसी चीनी बच्चे की तुलना में यह पांच गुना ज्यादा है। भारत में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 1.73 मीट्रिक टन है।

सबसे कम फर्टिलिटी रेट कहां है?
दुनिया में सबसे कम फर्टिलिटी रेट ताइवान में है। 2.38 करोड़ की आबादी वाले इस देश में हर महिला 1.21 बच्चों को जन्म दे रही है। मोल्दोवा में हर महिला 1.23 बच्चों और पुर्तगाल 1.24 बच्चों को जन्म दे रही है। भारत में फर्टिलिटी रेट 2.0 है।

लोगों की औसत उम्र सबसे कम कहां?
अफ्रीकी देश नाइजर दुनिया का सबसे युवा आबादी वाला देश है। यहां के लोगों की औसत आयु मात्र 15.2 वर्ष है। भारत में 15-59 वर्ष की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है। आबादी का 60% हिस्सा इसमें आता है।



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शिक्षा लड़कियों को परिवार नियोजन की समझ देती है। साथ ही शिक्षा उन्हें बाल विवाह व कच्ची उम्र में मां बनने से भी बचाती है। -प्रतीकात्मक फोटो


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