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कोर्ट में आज दो मामले: स्पीकर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हो सकता है फैसला; हाईकोर्ट में बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ सुनवाई https://ift.tt/339LAWv

राजस्थान में सियासी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। कांग्रेस की लड़ाई कोर्ट और राजभवन तक जा पहुंची है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट सोमवार को स्पीकर सीपी जोशी की सचिन पायलट खेमे के विधायकों को भेजे गए नोटिस के मामले पर सुनवाई करेगा।

वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ स्पीकर के समक्ष दायर उनकी याचिका में कार्रवाई नहीं होने को चुनौती दी है। दिलावर की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट के जस्टिस महेन्द्र गोयल सुनवाई करेंगे। इसमें विधानसभा स्पीकर, सचिव सहित बसपा के छह एमएलए को भी पक्षकार बनाया गया है।

दिलावर के वकील आशीष शर्मा ने बताया कि प्रार्थी ने स्पीकर के यहां चार महीने पहले मार्च 2020 में बसपा एमएलए लखन सिंह (करौली), राजेन्द्र सिंह गुढ़ा (उदयपुरवाटी), दीपचंद खेड़िया (किशनगढ़ बास), जोगेन्दर सिंह अवाना (नदबई), संदीप कुमार (तिजारा) और वाजिब अली (नगर भरतपुर) के कांग्रेस में विलय के खिलाफ स्पीकर को शिकायत की थी।

साथ ही, स्पीकर से आग्रह किया था कि वे इन छह एमएलए को दल-बदल कानून के तहत राजस्थान विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करें। लेकिन, स्पीकर ने शिकायत पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

देशभर में राजभवन के सामने होंगे प्रदर्शन

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सोमवार को कांग्रेस की सेव डेमोक्रेसी सेव कॉन्सटीट्यूशन मुहीम के तहत देशभर में राजभवन के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। राजस्थान मे ऐसा नहीं किया जाएगा। हमने महामहिम को कैबिनेट का रिवाइज्ड नोट भेज दिया है और उम्मीद करते हैं कि वे जल्द सत्र आहूत करने की स्वीकृति देंगे।

14 दिन पहले नोटिस देने से शुरू हुआ विवाद

  • 14 जुलाई : स्पीकर जाेशी ने पायलट सहित 19 विधायकों को अयोग्यता का नोटिस दिया, 17 जुलाई तक जवाब मांगा।
  • 16 जुलाई : नोटिस के खिलाफ पायलट सहित 19 विधायक हाईकोर्ट में गए। मुख्य सचेतक महेश जाेशी ने कैविएट लगा दी।
  • 17 जुलाई : हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सुनवाई की और मामला खंडपीठ में भेजा। खंडपीठ ने 18 जुलाई काे सुनवाई तय की।
  • 18 जुलाई : खंडपीठ ने अगली सुनवाई 20 जुलाई तय की और स्पीकर से कहा कि वे 21 जुलाई तक नोटिस पर कार्रवाई न करें।
  • 20 जुलाई : बहस पूरी नहीं हुई, 21 जुलाई को भी सुनवाई।
  • 21 जुलाई : हाईकोर्ट ने फैसला 24 जुलाई के लिए सुरक्षित रख लिया। स्पीकर को भी कोई निर्णय नहीं करने के लिए कहा।
  • 22 जुलाई : हाईकोर्ट के दखल पर स्पीकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
  • 23 जुलाई : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट का फैसला आने दीजिए। यह हमारे फैसले के अधीन रहेगा।
  • 24जुलाई : हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी काे सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई से अभी राेक दिया। हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।

5 सवालों से समझिए...राजस्थान की सियासत की पूरी तस्वीर

1. हाईकोर्ट के फैसले का पायलट खेमे पर क्या असर होगा?

जवाब: हाईकोर्ट ने 19 विधायकों को नोटिस मामले में यथास्थिति को कहा है। मायने यह कि अभी उनकी सदस्यता रद्द नहीं होगी। आदेश का सोमवार को सुप्रीम कोर्ट रिव्यू करेगा।

2. क्या गहलोत सरकार के पास बहुमत है?

जवाब: गहलोत सरकार ने राजभवन ले जाकर विधायकों की परेड करवाई। इसमें 102 का आंकड़ा दिया है। इनमें कांग्रेस के 88, निर्दलीय 10, बीटीपी के 2, सीपीएम और आरएलडी का एक-एक विधायक है। यदि इतने विधायक फ्लोर टेस्ट में सरकार का साथ देते हैं तो सरकार बहुमत हासिल कर लेगी। यदि दो-पांच विधायक भी इधर-उधर हुए तो सरकार खतरे में है।

3. क्या राज्यपाल सोमवार को विशेष सत्र बुलाएंगे?

जवाब: राज्यपाल ने शुक्रवार रात कैबिनेट से कोरोना का हवाला देने और जल्दबाजी में विशेष सत्र बुलाने जैसे 6 सवाल पूछे थे। इससे लगता है कि राज्यपाल सोमवार को या इमरजेंसी में सत्र बुलाने की अनुमति नहीं देंगे। यदि कैबिनेट ने दूसरी बार राजभवन को प्रस्ताव भेजा तो नियमानुसार राज्यपाल मना भी नहीं कर सकते। लेकिन, तुरंत सत्र की गुंजाइश नहीं लग रही है।

4. आखिर सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं गहलोत?

जवाब: सत्र बुलाना तो बहाना है। मंशा बिल लाकर व्हिप जारी करना है, जो बागी बिल के खिलाफ वोट देंगे उनकी सदस्यता रद्द होगी। इसीलिए राज्यपाल को जो पत्र दिया, उसमें फ्लोर टेस्ट का उल्लेख नहीं। 19 की विधायकी गई तो बहुमत को 92 विधायक चाहिए जो सरकार के पास हैं।

5. भाजपा की सत्र बुलाने में रुचि क्यों नहीं है?

जवाब: भाजपा नहीं चाहती कि सरकार सत्र बुलाकर पायलट गुट पर एक्शन ले। वह चाहती है कि 19 विधायकों की सदस्यता बची रहे और जरूरत पड़े तो सरकार को हिला सकें।

सियासी संग्राम से पहले विधानसभा में स्थिति

107 कांग्रेस

और अब ये हालात

गहलोत के पक्ष में: 88 कांग्रेस, 10 निर्दलीय, 2 बीटीपी, 1 आरएलडी, 1 माकपा यानी कुल 102

पायलट गुट: 19 बागी कांग्रेस, 3 निर्दलीय। कुल 22

भाजपा प्लस: 72 भाजपा, 3 आरएलपी। कुल 75

माकपा 1 : गिरधारी मईया फिलहाल तटस्थ।



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14 जुलाई को स्पीकर जाेशी ने पायलट सहित 19 विधायकों को अयाेग्यता का नोटिस दिया था। जिसके बाद से मामला पहले हाइकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।


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