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लॉकडाउन में छूट मिलते ही वसीयत कराने वालों की संख्या 37% तक बढ़ी, लोगों काे डर, कुछ हो गया तो बाद में परिवार के सदस्य प्रॉपर्टी को लेकर न झगड़ें https://ift.tt/2En1J0C

(रोहित रोहिला) कोरोनाकाल में लोगों को अपनी हेल्थ के साथ-साथ प्राॅपर्टी की चिंता भी सता रही है। यही वजह है कि लॉकडाउन में मिली छूट के बाद पंजाब की तहसीलों में वसीयत कराने वालों की संख्या पहले की अपेक्षा बढ़ गई है। लॉकडाउन से पहले जहां पंजाब में हर माह औसतन 400 वसीयतें बनती थी। जून-जुलाई में इनकी संख्या बढ़कर 550 तक हो गई।

यानी वसीयत कराने वालों की संख्या में 37% तक बढ़ोतरी हुई है। अफसरों के अनुसार, 60% लोग कोरोना के डर से वसीयतें बना रहे हैं। इन्हें डर है कि अगर कोरोना की वजह से कुछ हो गया तो बाद में परिवार के लोग प्राॅपर्टी को लेकर लड़ाई न करें।

20% लॉकडाउन की वजह से वसीयत नहीं करवा पाए थे जबकि 20% रूटीन वाले हैं। इन दिनों लोग वसीयत बनवाने को लेकर तहसीलों में एप्वाइंटमेंट तक ले रहे हैं। वसीयत बनवाले वालों में 55 से लेकर 80 साल तक के लोग शामिल हैं। राजस्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़ ने कहा, लॉकडाउन में ढील देने के बाद तहसीलों में रजिस्ट्री व वसीयत बनवाने वालों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है।

लॉकडाउन से पहले हर महीने करीब 400 वसीयत होती थीं

पंजाब के 22 जिलों की 79 तहसीलों में लॉकडाउन से पहले हर माह करीब 400 वसीयतें बनती थीं जो कि औसतन साल में 4800 के करीब हैं। लेकिन कोरोना के बाद और लॉकडाउन में छूट मिलने पर अब हर माह 550 लोग वसीयत बनवा रहे हैं। जून-जुलाई में ही 1020 रजिस्टर्ड वसीयतें हुई हैं।

यानी पहले की अपेक्षा 220 वसीयतें ज्यादा बनी हैं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि लोगों में प्राॅपर्टी को लेकर कितनी चिंता है। जून में लॉकडाउन की वजह से वसीयतों को रजिस्टर्ड नहीं करवा पाने वाले लोग भी शामिल हैं। लेकिन, अगस्त में वसीयत करवाने वालों की संख्या लॉकडाउन से पहले की तरह ही आ रही है।

पहले ही बनवा ली थी विल, अब रजिस्टर्ड कराई

मोहाली की स्वर्ण कौर ने बताया कि उन्होंने कोरोना के डर से वसीयत बनवाई और रजिस्टर्ड करवाई। मोहाली की करतार कौर ने बताया कि उन्होेंने पहले ही विल बनवा ली थी। कोरोना के डर से अब रजिस्टर्ड कराई है।

दो तरह की होती हैं वसीयतें

लोग 2 तरह की वसीयतें बनाते हैं। पहली वकील से बनाने के बाद उसे तहसील से रजिस्टर्ड नहीं कराया जाता है लेकिन, इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। तहसील में रजिस्टर्ड होने के बाद ही पक्की वसीयत मानी जाती है। इसी वसीयत के मुताबिक, बच्चों या परिवार में प्राॅपर्टी का बंटवारा किया जाता है।

वसीयत रजिस्टर्ड कराने के लिए घर पर भी बुलाया जा सकता है

अगर किसी की तबीयत खराब है और वह अपनी वसीयत को रजिस्टर्ड करवाने के लिए तहसील में नहीं जा सकता है तो एक आवेदन देकर तहसीलदार या नायब तहसीलदार को अपने घर पर वसीयत को रजिस्टर्ड करवा सकता है।

पहले 1-2 लोग आते थे, अब आ रहे 8-10

वसीयत के डॉक्यूमेंट तैयार करने वाले लेखराज कहते हैं पहले रोज 1-2 लोग आते थे अब 8-10 आते हैं। डॉक्यूमेंट तैयार करने वाले जसविंद्र जैंती कहते हैं पहले ज्यादा उम्र के लोग आते हैं अब 50-55 साल के भी आ रहे हैं।



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वसीयत कराने वालों की संख्या में 37% तक बढ़ोतरी हुई है। (फाइल फोटो)


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