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यहां 6 महीने लॉकडाउन रहता है, ताकि घरों में नमी न पहुंचे, बारिश की तेज आवाज से बचने के लिए छतों को बनाते हैं साउंडप्रूफ https://ift.tt/32CeUTq

(पनजुबम चिंगखेइंगबा) मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से 65 किमी दूर ईस्ट खासी हिल की पहाड़ियों के बीच छोटा-सा गांव मासिनराम बसा है। यहां सालाना 11,872 मिमी बारिश होती है, जो दुनिया में किसी एक जगह पर होने वाली सर्वाधिक बारिश है।

प्रकृति के बीच उसी के संसाधनों के साथ कैसे जीवन जिया जाता है, मासिनराम के लोग इसकी एक मिसाल हैं। गांव के मुखिया लसबोर्न शांगलिंग बताते हैं कि लगभग हर मौसम में यह इलाका बादलों से घिरा रहता है। मई से अक्टूबर के बीच ऐसे कई मौके आते हैं जब लगातार 9 दिन, 9 रात तक बारिश होती है।

महीनों सूर्य के दर्शन नहीं होते

महीने गुजर जाते हैं जब सूर्य देवता के दर्शन नहीं होते। स्कूल टीचर एनआर रापसान्ग बताते हैं कि मई से अक्टूबर तक हमें स्कूल बंद करना पड़ता है। छात्र अगर आते भी हैं, पूरी तरह भीग चुके होते हैं। बावजूद इसके हम कोर्स हर साल समय पर ही खत्म करते हैं।

यहां सबसे बड़ी चुनौती है घर में बारिश और उससे होने वाली नमी रोकना। इसके लिए खिड़की, दरवाजे और सभी झरोखे पूरी तरह से बंद करने पड़ते हैं। एक छोटी सी लापरवाही पूरे घर और उसमें रखे सामान को भिगो देती है। दिन में तीन से चार बार कपड़े हीटर की मदद से सुखाने पड़ते हैं।

छतों पर मोटी घास की परत बिछाते थे

गांव के महासचिव दोहलिंग बताते हैं कि कुछ साल पहले तक लोग मूसलाधार बारिश की आवाज से बचने के लिए छतों पर मोटी घास की परत बिछाते थे। लेकिन अब ये बातें पुरानी हो गई हैं। इनकी जगह नई तकनीक ने ले ली है। सरपंच लसबोर्न बताते हैं कि यहां 1000 परिवार हैं, जिनमें ज्यादातर खासी जनजाति के हैं।

कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा, तो गांव के लोगों को घर में रहने में बिल्कुल भी झिझक नहीं हुई। मई से अक्टूबर तक पुरखों के समय से लॉकडाउन की प्रैक्टिस चली आ रही है। इस दौरान लोग तभी घरों से निकलते हैं, जब बहुत जरूरी काम होता है।

इस नियम का कड़ाई से पालन होता है। सभी लोग घरों में ही रहकर कैरम, कार्ड जैसे गेम खेलकर अपना समय बिताते हैं। घर के बुजुर्ग बच्चों को रीति-रिवाज और किस्से-कहानियां सुनाते हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद यह समय बहुत मीठी यादें लेकर भी आता है।

बांस की तिकोनी टोपी पहनावा बन गया है
गांव की खास पहचान बारिश से बचने के लिए बांस से बनी एक विशेष तरह की टोपी है। स्थानीय भाषा में इसे क्नूप कहते हैं। लोग तेज बारिश में भी इसकी मदद से तमाम काम आराम से करते हैं।

दुनिया की सबसे लंबी गुफा भी यहीं मिली
2016 में गांव में दुनिया की सबसे बड़ी बलुआ पत्थर की गुफा भी खोजी गई। इसे क्रेमपुरी कहा जाता है। यह 24, 583 मीटर लंबी है। दूसरे पायदान पर वेनेजुएला की गुफा है।



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बारिश से बचने के लिए बांस की तिकोनी टोपी से खुद को ढककर खेतों में काम करते मासिनराम के किसान।


from Dainik Bhaskar /national/news/there-is-a-lockdown-for-6-months-so-that-the-houses-do-not-get-moisture-roofs-are-soundproofed-to-avoid-the-loud-sound-of-rain-127670472.html

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