Skip to main content

रूस और बेलारूस की जनता तानाशाह शासकों से ऊब रही, विपक्षी नेता को जहर देने के मामले में पुतिन पर सवाल https://ift.tt/3gzF9Pf

पूर्व सोवियत संघ के दो प्रमुख देशों रूस और बेलारूस में वर्षों से सत्ता में जमे तानाशाहों के खिलाफ असंतोष उबल रहा है। बेलारूस में हजारों लोगों ने सड़कों पर आकर चुनावी धांधली के खिलाफ आवाज उठाई है। बेलारूस की स्थिति ने 1989 की बगावत की याद दिलाई है। रूसी शहर खबरोवस्क में कई सप्ताह से हजारों लोग स्थानीय गर्वनर की गिरफ्तारी और केंद्र सरकार की मनमानी का विरोध कर रहे हैं। राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन भयभीत लगते हैं। उनके सबसे लोकप्रिय प्रतिद्वंद्वी अलेक्सी नावाल्नी बर्लिन, जर्मनी के एक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। उन्हें जहर दिया गया है।

अपने समर्थकों को संरक्षण देकर टिके हुए हैं

पुतिन और मिंस्क, बेलारूस में एलेक्जेंडर लुकाशेंको प्रोपेगंडा, दमन और अपने समर्थकों को संरक्षण देकर टिके हुए हैं। पुतिन के सभी हथकंडे पुराने पड़ चुके हैं। दोनों नेता सोवियत संघ के पतन से पैदा हुई अराजकता से राहत दिलाने का वादा कर सत्ता में आए हैं। लुकाशेंको ने सोवियत संघ जैसी स्थिति जारी रहने की बात कही थी। पुतिन के सत्ता संभालने के बाद किस्मत से तेल के मूल्य बढ़ गए। सामान्य लोगों को फायदा तो हुआ, लेकिन उनके समर्थकों की चांदी रही।

अर्थव्यवस्था को आगे नहीं ले जा सके पुतिन, लुकाशेंको

दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर नजर डालिए। बेलारूस पूर्व सोवियत संघ की तर्ज पर चल रहा है। अधिकतर निर्यात पोटाश और रूस से रिफाइन किए गए पेट्रोलियम पदार्थों का होता है। वहीं रूस की अर्थव्यवस्था में अधिक खुलापन है। लेकिन, इंडस्ट्री और फाइनेंस सेक्टर पर पुतिन के भरोसेमंद पूंजीपतियों का कब्जा है। इस कारण प्रतिस्पर्धा और गतिशीलता का अभाव है। पुतिन पेट्रो पदार्थों से अलग हटकर कुछ नहीं कर पाए हैं। इसलिए तेल की कीमतों में गिरावट और कोरोना वायरस के प्रकोप की दोहरी मार ने अर्थव्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया है। तंगी के दौर में उनके पास राष्ट्रवाद और पुराने दिनों की याद दिलाने का झुनझुना भर है।

पुतिन ने पुराने गौरव का काल्पनिक ढोल पीट रखा है

पिछले दो दशक से पुतिन ने जारशाही और सोवियत संघ के पुराने गौरव का काल्पनिक ढोल पीट रखा है। उनका शासन गलत सूचनाएं फैलाने में माहिर है। उसने इंटरनेट पर ट्रोलर्स की फैक्ट्री खोल रखी है। एक टिप्पणीकार का कहना है, पुतिन ने मीडिया में ऐसा माहौल रचा है, जहां कुछ भी सच नहीं है और सब कुछ संभव है। फिर भी, पुतिन नावाल्नी के सामने थके हुए लगते हैं। नावाल्नी के लोकप्रिय यूट्यूब वीडियो लोगों के बीच हताशा की झलक दिखाते हैं। उनमें पुतिन सरकार के भ्रष्टाचार का चित्रण गहरी रिसर्च के साथ किया गया है।

दोनों नेताओं के उत्तराधिकारी भी नापसंद

आर्थिक और सांस्कृतिक पुनर्जीवन में नाकाम पुतिन और लुकाशेंको अपनी सरकार को नया स्वरूप नहीं दे पाए हैं। उनका कोई स्वीकार्य उत्तराधिकारी नहीं है। लुकाशेंको ने अभी हाल में अपने 15 साल के बेटे को फौजी पोशाक में पेश किया है। पुतिन आसानी से अपना उत्तराधिकारी तैयार नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इससे उनके गुट में अंसतोष पैदा होगा।

उन्होंने इस साल 2036 तक स्वयं सत्ता में रहने के लिए संविधान में बदलाव किया है। उस समय उनकी आयु 84 वर्ष हो जाएगी। दूसरी ओर नावाल्नी 13 सितंबर को होने वाले क्षेत्रीय चुनावों के लिए विपक्षी मतों को एकजुट करने की कोशिश में लगे थे। नावाल्नी को जहर देने की घटना से साफ है कि तानाशाहों के पास जब कोई नया हथकंडा नहीं होता तो वे हिंसा पर उतारू हो जाते हैं।

पुतिन ने रूस में माफिया जैसा साम्राज्य कायम कर रखा है

रूस में व्लीदीमीर पुतिन ने माफिया जैसे शासन का निर्माण किया है। सरकार नावाल्नी को जर्मनी भेजने में आनाकानी करती रही। उन्हें जहर देने की जांच कराने से भी इनकार कर दिया है। पुतिन ने नावाल्नी काे अदालतों के माध्यम से कई बार कैद रखा है। उन्हें चुनाव में हिस्सा नहीं लेने दिया गया। दोनों नेताओं ने मीडिया को पालतू बनाकर अपनी छवि उजली रखी है। लुकाशेंको पुराने जमाने के तानाशाह जैसा बर्ताव करते हैं। उन्होंने पिछले सप्ताह एक हेलीकॉप्टर में घूमते और एके-47 गन दिखाते हुए अपना वीडियो जारी करवाया है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
रूस में व्लीदीमीर पुतिन ने माफिया जैसे शासन का निर्माण किया है।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/32zDTqD

Comments

Popular posts from this blog

Who is Nicole Osbourne? Inside Anthony Joshua’s split and co-parenting https://ift.tt/jrKHYQR

Boxer Anthony Joshua's personal life draws attention. His son's mother, Nicole Osbourne, a dancer and yoga instructor, shares co-parenting duties. They maintain a respectful relationship focused on their son Joseph. Joshua's career demands often kept him away, contributing to their split. He remains dedicated to fatherhood amidst ongoing boxing discussions. from Times of India https://ift.tt/IxmCXUE