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टेक्नालॉजी के हाथों इंसान का भाग्य होगा या दीर्घजीवी मानव के नियंत्रण में होगी ‘सुपर टेक्नोलॉजी‘?, इस फैसले की दहलीज पर खड़ी है ग्लोबल दुनिया https://ift.tt/32WzwWM

इस साल शुरू की दो खबरों ने दुनिया को चौंकाया। अमरत्व और महामारी से जुड़ीं। पहली, इंसान 400 से 500 वर्षों तक जी सकता है। दूसरी, कोविड-19 की धमक। पहली, इंसान की प्रतिभा-सृजन क्षमता का उत्कर्ष। दूसरी, प्रकृति के प्रताप की चेतावनी। जनवरी 10 की खबर है।

‘बक इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एजिंग’ (कैलिफोर्निया, अमेरिका) व चीन की नानजिंग यूनिवर्सिटी ने गहन शोध में पाया कि इंसानी जीवन कई सौ वर्ष संभव है। पहली कोरोना मौत की खबर चीन ने 11 जनवरी को दी। अनश्वर होने की ओर बढ़ता इंसान और औचक महारोग की खबरें एक दिन के अंतर से आईं।

पहली खबर पढ़ी, तो ‘टाइम’ पत्रिका की कवर स्टोरी याद आई, जिसमें कुर्जविल ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी और नैनोटेक्नोलॉजी हमें क्षमता देते हैं कि हम मानव शरीर और आसपास के संसार को आणविक (माल्यूक्यूलर) स्तर पर बदल लें। 2016 में कुर्ज ने कहा कि अपने जीवनकाल में हम 20,000 वर्षों की प्रगति देखेंगे। वे चिंतक और ‘फ्यूचरिस्ट’ हैं। उनका आकलन सटीक माना जाता है।

‘वॉल स्ट्रीट’ ने उन्हें ‘रेस्टलेस जीनियस’ माना, तो ‘फोर्ब्स’ ने ‘द अल्टीमेट थिंकिंग मशीन’। अतुल जालान ने अपनी पुस्तक ‘व्हेयर विल मैन टेक अस?’ में बताया है कि कुर्ज की उम्र 70 वर्ष है। वे प्रतिदिन विटामिन, मिनरल्स व सप्लीमेंट्स की 200 गोलियां खातें हैं। दीर्घजीवी होने के लिए। वे कह चुके हैं कि ‘विलक्षणता (सिंगुलरिटी) करीब है।’

कम्प्यूटिंग क्षमता में अनंत वृद्धि से जो ‘आर्टिफिशियल इटेलिजेंस’ (एआई) सृजित होगी, वह अरबों गुणा, मानव इंटेलिजेंस से समृद्ध होगी। वेनर विंजे ने अपनी किताब ‘द कमिंग टेक्नोलॉजिकल सिंगुलरिटी’ में माना है कि आगामी 30 वर्षों में, हमारे पास वे साधन होंगे कि हम ‘सुपरह्यूमैन इंटेलिजेंस’ ईजाद कर सकें।

सिंगुलरिटी, अवधारणा है। जब मशीनें स्वतः अपने को ‘स्मार्ट’ बनाएंगी, तब क्या वे धरती की प्राकृतिक संपदा पर इंसान को अनावश्यक बोझ मानेंगी? या इंसान, मशीन का लाभ लेकर खुद को अमर बना लेगा? यह परिकल्पना उस क्षण की है, जब ‘इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन’ होगा।

निक बिल्टन ने ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में लिखा था ‘कल्पना करिए, एक मेडिकल रोबोट, जो मूलतः कैंसर विशेषज्ञ है, अगर वह इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि कैंसर मुक्ति का श्रेष्ठ रास्ता है कि मानव प्रजाति ही खत्म हो।’ स्टीफन हॉकिंग और एलन मस्क ने ऐसी स्थिति में सावधानी बरतने वाले कदमों के शोध की बात की है, ताकि भविष्य की सुपर इंटेलिजेंट मशीनें, मानव नियंत्रण में रहें।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में मनुष्य पीछे होगा। विचार, प्रतिभा या निर्णय क्षमता मशीनों में बहुत अधिक होगी। ऐसी मशीनें आएंगी कि कानूनी शोधकर्ता, वित्तीय निवेश के मध्यस्थ, हृदयरोग व ईएनटी के विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों की जरूरत न पड़े। पहली बार 1965 में एल्विन टॉफलर ने ‘फ्यूचर शॉक’ शब्द, इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि पुरानी सभ्यता-संस्कृति की सभी जड़ें, राष्ट्र, समुदाय, परिवार, प्रोफेशन, धर्म, बदलाव के इस महाप्रलय में बदल जाएंगे। तकनीकी भाषा में माना जाता है कि इंसान घुमंतु शिकारी था। वह समाज का पहला स्तर (1) था। फिर खेतिहर समाज (2) बना। आगे औद्योगिक समाज (3)। पुनः गति आई, सूचना क्रांति, फिर दुनिया ग्लोबल विलेज में तब्दील (4)।

अब नए समाज का उदय हो रहा है (5)। वह दुनिया जिसमें उड़ने वाली कारें, हाइपरफास्ट ट्रेनें, बिना चालक कारें-ट्रकें होंगी। फ्रिज जो स्वतः खाने का आर्डर देगा। रोबोट लड़ेंगे। माइक्रोस्कोपिक नैनो बोट्स शरीर की अंदरूनी बीमारी को मॉनिटर करेंगे। डिजाइनर शिशु भी पैदा होंगे। इस तरह के अनेक अविश्वसनीय बदलाव इंसान के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।

प्रो. स्टीफन हॉकिंग ने कहा कि एआई या तो मानव समाज के लिए सर्वश्रेष्ठ वरदान होगा या अकल्पित विनाशकारी। एक तरफ इंसान की यह प्रगति? दूसरी ओर प्रकृति का अपना मिजाज!

स्टीफन हॉकिंग की अंतिम किताब ‘ब्रीफ आंसर्स टू द बिग क्वेश्चन्सं’ में उनकी मान्यता है कि ग्लोबल वार्मिंग, परमाणु खतरे, बढ़ती जनसंख्या, एआई, खत्म होती प्राकृतिक संपदा जैसे गंभीर खतरे हैं, धरती के लिए। उन्होंने कहा कि इंसान नहीं चेता, तो उसे रहने के लिए दूसरे ग्रह तलाशने होंगे। आगामी 50 वर्षों में यह संसार अप्रत्याशित रूप से बदल जाएगा।

प्रो. हॉकिंग कहते हैं कि हर वैज्ञानिक का पुनीत फर्ज है, आम लोगों को बताना कि इन बड़े सवालों के प्रति वे सचेत हों। यह कभी लोक चर्चा-संवाद का विषय नहीं रहा। गुजरे 600 वर्षों में विचारों ने दुनिया को बदला। पिछले तीन दशकों से टेक्नोलॉजी, बदलाव की ड्राइविंग सीट पर है। उसे पूंजी और बाजार का अपूर्व समर्थन है।

जरूरी है, यह बदलाव राजनीति या व्यापक समाज का मुद्दा बने। कारण, टेक्नालाजी के हाथों इंसान का भाग्य होगा या दीर्घजीवी मानव के नियंत्रण में होगी ‘सुपर टेक्नोलॉजी? इस फैसले की दहलीज पर, खड़ी है ग्लोबल दुनिया। इसलिए वक्त गुजरने से पहले, दुनिया में इस पर आम सहमति होना अनिवार्य है। कारण, प्रो. हॉकिंग ने कहा है कि इस ग्लोबल दुनिया में इंसान की नियति एक है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)



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