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अब ये तय हो गया है कि कोरोनावायरस अहम मुद्दा होगा; ट्रम्प राष्ट्रपति के तौर पर जिम्मेदारियां न निभा पाए तो क्या हालात बनेंगे https://ift.tt/2Sp5UfM

चुनाव में अब सिर्फ एक महीना बाकी रह गया है। पहले इस बात पर बहस हो सकती थी कि कोरोनावायरस मतदाताओं के लिए कितना बड़ा मुद्दा है। लेकिन, अब नहीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और फर्स्ट लेडी मेलानिया संक्रमित हो चुके हैं। वे आगे कैम्पेन कर पाएंगे या नहीं, कहना मुश्किल है। लेकिन, यह तय है कि अब कोरोनावायरस सबसे अहम मुद्दा बन गया है।

पिछले कुछ दिनों में ट्रम्प का बर्ताव देखें तो लगता है कि वे लोगों का ध्यान इस मुद्दे से हटाना चाहते थे। लेकिन, अब ऐसा चाहकर भी नहीं हो सकता। नस्लवाद, हिंसा, व्हाइट सुप्रीमेसी, सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति ट्रम्प के पर्सनल टैक्स पर खुलासे। ये मुद्दे पीछे छूट गए हैं।

महामारी इसलिए सबसे बड़ा मुद्दा
‘न्यू अमेरिका’ थिंक टैंक की हेड एनी मेरी स्लैटर कहती हैं- पब्लिक हेल्थ सबसे जरूरी है। और अगर आप इस मुद्दे पर पास नहीं हो पाते तो लोगों के लिए बाकी चीजों का कोई महत्व नहीं है। सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोगों की हिफाजत करना है। साउथ कोरिया की मिसाल हमारे सामने है। वहां सरकार ने वायरस पर कंट्रोल किया। चुनाव हुए तो फिर सत्ता में आई। लोगों ने हेल्थ के मसले पर उसके अच्छे काम को सराहा। महामारी के दौर में अमेरिकी चुनाव दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव है। लेकिन, यहां ट्रम्प सरकार इस मुद्दे पर मुश्किल में नजर आती है।

समस्या ये है कि महामारी से कई मुद्दे जुड़ते चले गए। हेल्थ के साथ इकोनॉमी और फ्रीडम भी जुड़ गए। सरकार की नाकामी नजर आने लगी। खुद राष्ट्रपति ने इसे कितनी गंभीरता से लिया। ये भी सामने आ गया। उन्होंने दुनिया में सबसे बुलंद आवाज में इसके खतरे को नकारा। अब वोटर्स क्या फैसला करते हैं, इसका इंतजार रहेगा।

कुछ सवाल उठने लगे हैं...

अगर राष्ट्रपति का निधन हो जाए तो...
25वें संविधान संशोधन के मुताबिक, अगर राष्ट्रपति का निधन हो जाता है, इस्तीफा दे देते हैं या वे काम करने के काबिल नहीं रह जाते हैं तो इन हालात में वाइस प्रेसिडेंट राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाते हैं। अमेरिकी इतिहास में अब तक 8 बार ऐसा हो चुका है। आखिरी बार 1963 में हुआ था। जॉन एफ कैनेडी की हत्या के बाद लिंडन जॉनसन राष्ट्रपति बने थे।
अगर उप राष्ट्रपति की भी मौत हो जाए या वे काम करने के काबिल न हों तो, फैसला सीनेट करती है कि क्या करना है। वैसे सीनेट के स्पीकर को सत्ता सौंपे जाने की व्यवस्था है।

अगर प्रेसिडेंट गंभीर रूप से बीमार हो जाएं तो...
इन हालात में प्रेसिडेंट सीनेट को यह बताएंगे कि वे गंभीर रूप से बीमार हैं और राष्ट्रपति के तौर पर अपनी शक्तियां उप राष्ट्रपति को सौंपना चाहते हैं। सीनेट इस पर मुहर लगाएगी। ट्रम्प भी ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, व्हाइट के प्रवक्ता ने शुक्रवार को ही साफ कर दिया कि ट्रांसफर ऑफ पावर की जरूरत नहीं क्योंकि ट्रम्प ही इनचार्ज हैं।

क्या राष्ट्रपति तो जबरदस्ती हटाया जा सकता है....
25वें संविधान संशोधन के मुताबिक, ऐसा हो सकता है। अगर वो गंभीर रूप से बीमार हो और फिर भी इस्तीफा न दे। 1919 में कुछ ऐसे ही हालात थे। वुडरो विल्सन पैरालाइज्ड हो गए थे। आंखों की रोशनी भी न के बराबर हो गई थी। संविधान के मुताबिक, इस स्थिति में वाइस प्रेसिडेंट कैबिनेट के साथ सरकार चलाएगा। कांग्रेस सरकार चलाने के लिए कमेटी भी बना सकती है। यह प्रशासन तब तक जारी रह सकता है जब तक प्रेसिडेंट सीनेट को यह न बता दे कि वो स्वस्थ हो गया है और अपना काम कर सकता है।

अगर सत्ता को लेकर कुछ तय हो सके तो...
सवाल उठता है कि अगर दोनों बड़े नेता (राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति) सरकार चलाने के काबिल न हों (किसी भी वजह से) तो क्या होगा। हार्वर्ड लॉ स्कूल के प्रोफेसर जैक गोल्डस्मिथ कहते हैं- इन हालात में सीनेट स्पीकर या सरकार के सबसे बड़े मंत्री (ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन में विदेश मंत्री माइक पोम्पियो) सत्ता संभाल सकते हैं।

अगर, ट्रम्प अब सरकार ने चला पाएं तो..
रिपब्लिकन पार्टी की नेशनल कमेटी कार्यकाल पूरा होने तक नया नाम तक कर सकती है। इसमें 168 मेंबर हैं। हर राज्य के तीन मेंबर हो सकते हैं। लेकिन, चूंकि चुनाव प्रक्रिया जारी है। लिहाजा, ऐसा करना आसान नहीं होगा। क्योंकि, बैलट पर नाम प्रिंट हो चुके हैं।



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फोटो शुक्रवार शाम की है। तब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ओवल ऑफिस से मेरीलैंड के मिलिट्री हॉस्पिटल जाने के लिए निकले थे।


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