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मुझसे तेजस्वी को क्या खतरा होगा, उनके माता-पिता सीएम रहे हैं, मेरी मां आंगनबाड़ी में पढ़ाती हैं https://ift.tt/31ZqYP1

कन्हैया कुमार इस विधानसभा चुनाव मे ज्यादा प्रचार नहीं कर रहे हैं। वो ज्यादातर समय बेगूसराय के अपने घर में रहते हैं और आसपास की कुछ विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने चले जाते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में चर्चा का केंद्र रहे और इस चुनाव में होने वाली चर्चाओं से खुद को बाहर रखने वाले कन्हैया से हमारी मुलाकात बेगूसराय में उनके घर पर हुई। हमने उनसे चुनाव और राजनीति पर सवाल-जवाब किए...

2019 के लोकसभा चुनाव में आप स्टार कैंडिडेट थे, एक साल बाद हो रहे इस विधानसभा चुनाव से आप बाहर क्यों है?

नहीं। चुनाव से हम बाहर नहीं हैं। चुनाव में होने का मतलब उम्मीदवार होना ही नहीं होता है। बतौर मतदाता भी आप चुनाव में होते हैं। हम तो मतदाता से आगे बढ़कर और जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं। कई जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं। प्रचार कर रहे हैं। जन संपर्क कर रहे हैं। सभाएं कर रहे हैं। पार्टी ने जो जिम्मेदारियां दी हैं, वो निभा रहे हैं।

चुनाव से बाहर रहने से मेरा मतलब है कि आप उतनी रैलियां नहीं कर रहे हैं, जितनी आप कर सकते हैं?

पहले चरण के चुनाव में हमने जरूर कोई बड़ी सभा नहीं की, लेकिन दूसरे चरण और तीसरे चरण की वोटिंग जहां-जहां है, वहां-वहां मेरी कुछ जिम्मेदारियां हैं। ये महागठबंधन के नेताओं के बीच तय हुआ था। बेगूसराय और मधुबनी में नामांकन के वक्त हम थे।

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महागठबंधन के लिए चुनावी सभा करते कन्हैया कुमार।

अब आप पीएम मोदी को लेकर उतने आक्रामक नहीं रहते जितना पहले रहा करते थे, इसकी कोई खास वजह?

राजनीति अगर मैथमेटिक्स होती तो दुनिया के सभी विश्वविद्यालयों में पॉलिटिकल साइंस का विभाग बंद करके उसे मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट में ही पढ़ाया जाता, लेकिन ऐसा है नहीं। ऐसा कोई कैलकुलेशन हम नहीं करते हैं। बिहार में एक कहावत है कि हंसुआ के बियाह में खुरपी का गीत नहीं गाना चाहिए।

महागठबंधन की लड़ाई सीधे तौर पर NDA से है, केवल भाजपा से तो है नहीं। यहां NDA में जदयू शामिल है। नीतीश जी राज्य में सरकार का चेहरा हैं। ऐसे में उन्होंने पिछले पंद्रह साल में क्या किया है, इसको लेकर ही बात होगी।

लोग कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में तेजस्वी की वजह से ही आप महा गठबंधन के उम्मीदवार नहीं बन पाए थे, तेजस्वी को आपसे खतरा है?

देखिए, एक तो हमसे किसी को कोई खतरा नहीं है। हमसे किसी को कैसे खतरा हो सकता है? हम इतने बड़े इंसान हैं ही नहीं कि किसी के लिए खतरा बन सकते हैं। ये तुलना भी संभव नहीं है। हम दो लोग अलग-अलग तरीके से अपना जीवन जी रहे रहे हैं। दोनों की पृष्ठभूमि भी अलग-अलग है। मैं एक ऐसे परिवार से आता हूं, जिसमें कोई राजनीतिक कद वाला व्यक्ति नहीं रहा है।

हमारे पास कोई ऐसा दल नहीं है, जो बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी हो, जिस पार्टी के पास दर्जनों विधायक हों। हां, हम एक ऐसी पार्टी के सदस्य हैं, जिसका इतिहास बहुत स्वर्णिम रहा है। नारंगी और सेब की आपस में तुलना नहीं होनी चाहिए। दोनों के बीच कोई तुलना भी नहीं है, उनके माता-पिता मुख्यमंत्री रहे हैं। मेरी मां आंगनबाड़ी में पढ़ाती हैं।

आपकी इसी पार्टी के बारे में तेजस्वी यादव ने कहा था कि एक जाति की पार्टी है?

ये सवाल तो उनसे पूछा जाना चाहिए। वैसे चुनाव के वक्त लोग बहुत कड़वी-कड़वी बातें कहते भी हैं। मेरा ये मानना है कि चुनाव में भी किसी को लेकर बहुत तीखा हमला नहीं करना चाहिए। दुष्यंत चौटाला का उदाहरण हमारे सामने हैं। वो अपने भाषणों में कहते थे कि भाजपा को यमुना में डुबो देंगे। यमुना से इस तरफ आने नहीं देंगे।

ये सब कहने के बाद वो आज भाजपा के साथ ही सरकार बनाए हुए हैं। यही सब देखते हुए मैं ज्यादा आक्रामक होने से बचता हूं। उस समय सीट नहीं दी थी तो ये उनका राजनीतिक गुणा-भाग होगा। वो ही इस बार गठबंधन में शामिल हुए हैं तो ये भी उन्हीं का गुणा-भाग होगा।

क्या ये चुनाव केवल तेजस्वी यादव की मुख्यमंत्री बनाने का है क्या?

नहीं, चुनाव तो ये पूरे बिहार का है। ये चुनाव बिहार में बदलाव का है। इस बात के संकल्प का है कि बिहार में जात-पात की राजनीति का दी एंड हो गया है। आज कोई भी पार्टी खुले मंच से जाति की बात नहीं कर रही है। इसकी अगली स्टेज ये होनी चाहिए कि धर्म भी नहीं होना चाहिए।

चुनाव में हिंदू-मुसलमान भी नहीं होना चाहिए। हम लोग जितनी भी बातें करते हैं वो जय जवान-जय किसान के दायरे में होती है और वो लोग हर बार हिंदू, मुस्लिम करते हैं। ये बंद होना चाहिए। जनता की लोकतंत्र में आस्था कम हो रही है और ये कम खतरनाक नहीं है।

लालू यादव और तेजस्वी यादव के साथ कन्हैया कुमार। फाइल फोटो

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आप कह रहे हैं कि तेजस्वी को अपनी राजनीतिक विरासत का फायदा मिल रहा है?

इसमें कौन सी दो राय है। हरेक को मिलता है। केवल राजनीति में नहीं मिलता है, हर क्षेत्र में मिलता है। फिल्मों में अभिषेक बच्चन को अमिताभ बच्चन के नाम का फायदा तो मिला ही ना।

इसका मतलब है कि कन्हैया कुमार परिवारवाद का समर्थन कर रहे हैं?

नहीं। परिवारवाद हमारे समाज की हकीकत है। क्या अभिषेक बच्चन, नवाजुद्दीन सिद्दकी को खड़ा होने से रोक पाए? मनोज वाजपेयी को खड़ा होने से रोक पाए? इसका मतलब हुआ कि परिवारवाद उसे नहीं रोक सकता, जिसमें क्षमता होगी।

2019 में चुनाव हारने के बाद आप गायब हो गए, बेगूसराय छोड़ दिया, यहां तक की लॉकडाउन के दौरान भी आप किसी को नहीं दिखे?

अपने मुंह मियां मिट्ठू कैसे बनें। आप मेरे क्षेत्र में घूमकर देख लीजिए। अगर कोई भी राजनीतिक गतिविधि होती है तो हम या हमारे कार्यकर्ता वहां रहते हैं। लॉकडाउन में भी लोगों के बीच ही रहा हूं। हां, मैं हेल्प करते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर नहीं डालता हूं। ये ठीक नहीं लगता है। लॉकडाउन के दौरान हमने कोई परहेज नहीं किया। हमने हर पार्टी से मदद मांगी। बिना ये देखे कि कौन बेगूसराय का है और कौन नहीं, सबकी मदद करने की कोशिश की।



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What will be the danger to Tejashwi Yadav from me, his parents have been CM, my mother teaches in Anganwadi


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