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अब आप-हम भी खरीद सकते हैं कश्मीर में जमीन; आइए समझते हैं कैसे? https://ift.tt/3jJIcGb

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के कानूनों में बड़े बदलाव किए। पिछले साल 5 अगस्त को बने इस नए केंद्र शासित प्रदेश के लिए पांचवां ऑर्डर जारी किया। इसने राज्य के 12 पुराने कानून खत्म कर दिए। साथ ही 14 कानूनों में बदलाव किया।

पूरे देश में इस फैसले को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की सफलता माना जा रहा है, वहीं कुछ लोग जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक जमीन सुधार कानून को रद्द करने की आलोचना भी कर रहे हैं। दरअसल, पूरे भारत के लिए यह फैसला जितना साफ-सुथरा दिख रहा है, वह वैसा है नहीं। इससे जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को भी जमीन की खरीद-फरोख्त करने का अधिकार मिल गया है।

गृह मंत्रालय का आदेश क्या है?

  • केंद्र सरकार ने पिछले साल संविधान के आर्टिकल 370 और 35A को रद्द किया और जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाया था। आर्टिकल 35A यह गारंटी देता था कि राज्य की जमीन पर सिर्फ उसके स्थायी निवासियों का हक है। अब आर्टिकल 35A तो रहा नहीं, लिहाजा नए आदेश से जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने का रास्ता सबके लिए खुल गया।
  • जम्मू-कश्मीर के चार कानून ऐसे थे, जो स्थायी निवासियों यानी परमानेंट रेसिडेंट्स के हाथ में राज्य की जमीन सुरक्षित रखते थे। ये थे जम्मू-कश्मीर एलिनेशन ऑफ लैंड एक्ट 1938, बिग लैंडेड एस्टेट्स अबॉलिशन एक्ट 1950, जम्मू-कश्मीर लैंड ग्रांट्स एक्ट 1960 और जम्मू एंड कश्मीर एग्रेरियन रिफॉर्म्स एक्ट 1976। इनमें से पहले दो कानून रद्द हो गए हैं। बचे दोनों कानूनों में जमीन को लीज पर देने और ट्रांसफर करने से जुड़ी शर्तों में परमानेंट रेसिडेंट वाला क्लॉज हटा दिया है।

क्या कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में किसी भी जमीन को खरीद सकेगा?

  • नहीं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ जगह पाबंदियां अब भी लागू रहेंगी। जैसा कि जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि खेती की जमीन बाहरी लोग नहीं खरीद सकेंगे। कानून में बदलाव का उद्देश्य निवेश बढ़ाना है। खेती की जमीन सिर्फ किसानों के पास ही रहेगी।
  • बाहरी व्यक्ति जम्मू-कश्मीर में खेती को छोड़कर कोई भी जमीन खरीद सकेंगे। इसी तरह डेवलपमेंट अथॉरिटी अब केंद्रीय कानून के तहत जमीन का अधिग्रहण करेगी और तब लीज पर देने या अलॉट करने के लिए परमानेंट रेसिडेंट का नियम आवश्यक नहीं रहेगा।
  • इसी तरह डेवलपमेंट एक्ट के तहत जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से उद्योग लगाने और उनके लिए कमर्शियल सेंटर बनाने पर काम करेगा। औद्योगिक संपत्तियों को मैनेज करेगा और सरकार के नोटिफाइड इंडस्ट्रियल एरिया को डेवलप करेगा।

सेनाओं के लिए क्या कोई विशेष प्रावधान रखा है?

  • हां। हम सभी जानते हैं कि कश्मीर में सेना का डिप्लॉयमेंट और उसके लिए जमीन कितनी जरूरी है। इसके लिए डेवलपमेंट एक्ट में महत्वपूर्ण बदलाव किया है और यह आर्म्ड फोर्सेस को एनक्लेव बनाने की छूट देता है। यह सरकार को डेवलपमेंट अथॉरिटी की नियंत्रित जमीन पर स्ट्रैटेजिक एरिया तय करने का अधिकार देता है। इस क्षेत्र को सेना की डायरेक्टर ऑपरेशनल और ट्रेनिंग जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। कॉर्प कमांडर रैंक के अफसर भी इस बदलाव के लिए लिखित अनुरोध कर सकेंगे।

क्या कमजोर तबके के घरों को कोई भी खरीद सकेगा?

  • अब तक डेवलपमेंट एक्ट में लो-कॉस्ट हाउसिंग का नियम सिर्फ जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों में से आर्थिक रूप से कमजोर तबकों और कम आय वाले समूहों के लिए था। नया बदलाव देशभर के किसी भी इलाके के आर्थिक कमजोर तबके और कम आय वाले समूह को जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने या घर बनाने की इजाजत देता है।
  • यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने नई हाउसिंग पॉलिसी घोषित की है और पांच साल में वह एक लाख यूनिट्स बनाने वाली है। अफोर्डेबल हाउसिंग और स्लम एरिया डेवलपमेंट स्कीम के तहत पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप को बढ़ावा दिया जा रहा है।

तो क्या बाहरी लोगों को खेती की जमीन मिलेगी ही नहीं?

  • वैसे तो नए कानून में खेती की जमीन उसे नहीं बेच सकते जो किसान नहीं है। लेकिन, इसमें प्रावधान है कि सरकार या उसकी ओर से नियुक्त एक अधिकारी खेती की जमीन ऐसे व्यक्ति को बेचने, उपहार देने, एक्सचेंज या गिरवी रखने की मंजूरी दे सकता है। यहां जो व्यक्ति खरीद रहा है, उसके पास जम्मू-कश्मीर का स्थायी या मूल निवासी प्रमाण पत्र होना आवश्यक नहीं है। पहले तो लैंड यूज बदलने का अधिकार राजस्व मंत्री के पास था, अब कलेक्टर भी यह कर सकेगा।

केंद्र के आदेश को इतिहास पर हमला क्यों बोला जा रहा है?

  • गृह मंत्रालय के आदेश ने 70 साल पुराने जमीन सुधार कानून को खत्म कर दिया है। नया कश्मीर मेनिफेस्टो के तहत जागीरदारी प्रथा खत्म की गई थी। 1950 के बिग लैंडेड एस्टेट्स अबॉलिशन एक्ट में लैंड सीलिंग 22.75 एकड़ तय की गई थी। जिसके पास ज्यादा जमीन थी, उसकी जमीन भूमिहीनों में बांट दी गई थी। इसी तरह जम्मू-कश्मीर एग्रेरियन रिफॉर्म्स एक्ट में यह लैंड सीलिंग घटाकर 12.5 एकड़ कर दी गई थी। इस कानून को रद्द करने की वजह से ही जम्मू-कश्मीर के साथ ही देश के कई एक्सपर्ट कह रहे हैं कि यह कश्मीर के इतिहास पर बड़ा हमला है।

क्या यह बदलाव लद्दाख में भी लागू होंगे?

  • फिलहाल केंद्र सरकार के फैसले सिर्फ जम्मू-कश्मीर पर लागू होंगे, लद्दाख पर नहीं। लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था, लेकिन अब वह भी एक स्वतंत्र केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है। लद्दाख में भी आर्टिकल 35A लागू था और वहां भी जमीन पर परमानेंट रेसिडेंट्स का ही अधिकार है। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह लद्दाख को लेकर इस मसले पर डिस्कशन को तैयार है।


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