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JEE एडवांस टॉपर चिराग फेलोर ने खुद बताया- आईआईटी की जगह क्यों चुना एमआईटी, कैसे वहां पूरा हो सकता है मंगल ग्रह पर जाने का सपना https://ift.tt/3d7Bnwx

देश के 23 आईआईटी में एडमिशन के लिए हुई JEE एडवांस का रिजल्ट सोमवार को घोषित हुआ और इसमें पुणे के चिराग फेलोर 396 में से 352 स्कोर कर टॉपर बने। भारत में आईआईटी में जाना लाखों लोगों का सपना होता है, लेकिन चिराग ने किसी आईआईटी को नहीं बल्कि एमआईटी यानी मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को चुना।

इसे लेकर सोशल मीडिया पर अच्छी-बुरी दोनों तरह की रिएक्शन आई। वे ऐसा करने वाले पहले स्टूडेंट नहीं है। इससे पहले भी आईआईटी की जगह एमआईटी चुनने वालों की लंबी फेहरिस्त है। खैर, हमने चिराग से ही जानना चाहा कि इसकी वजह क्या है? साथ ही उन विषयों पर भी जवाब लिया, जो JEE मेन्स और JEE एडवांस की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए काम का हो सकता है।

सबसे पहले, चिराग ने एमआईटी क्यों चुनी?

चिराग का कहना है कि इसकी मुख्य तौर पर दो वजह है। पहली, एमआईटी में फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स भी फेकल्टी की लीडरशिप में रिसर्च शुरू कर सकते हैं। आईआईटी में यह सुविधा नहीं है। दूसरा, एमआईटी के 95 पूर्व छात्रों/फेकल्टी मेंबर्स को अलग-अलग विषयों का नोबेल पुरस्कार मिल चुका है। इनमें से कुछ प्रोफेसरों से सीधा संपर्क और पढ़ने का मौका एमआईटी में मिल सकता है, आईआईटी में नहीं।

क्या जो विषय एमआईटी में मिला, वह आईआईटी में नहीं मिलता?

चिराग कहते हैं कि उन्हें फिजिक्स लेना था। एस्ट्रो-फिजिक्स में करियर बनाना है। इसरो या नासा जाना है। ताकि मंगल ग्रह पर खोज में अपना योगदान दे सकें। आईआईटी में सारे टॉपर कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक्स ही चुनते हैं। ऐसे में एस्ट्रो-फिजिक्स में जो स्कोप एमआईटी में मिल सकता है, वह आईआईटी में नहीं मिल सकता। फिर एमआईटी में दुनियाभर के बेस्ट स्टूडेंट्स पहुंचते हैं, उनके साथ पढ़ने का अलग मजा है।

क्या एमआईटी में एडमिशन की कोई और भी वजह थी?

चिराग ने कहा कि बात यहां सिर्फ एस्ट्रो-फिजिक्स की नहीं है। JEE मेन्स और JEE एडवांस एक एंट्रेंस एग्जाम है, जिसे पास करने के बाद आईआईटी या एनआईटी में एडमिशन मिल जाता है। एमआईटी में ऐसा नहीं होता। वहां स्टूडेंट्स के ओवरऑल परफॉर्मंस को परखा जाता है। वह क्या और क्यों करना चाहता है, वह अपने लक्ष्य को लेकर कितना सीरियस है, इन बातों को भी देखा जाता है। ऐसा नहीं कि सिर्फ एक एग्जाम के परफॉर्मंस से जज कर एडमिशन दे दिया।

एमआईटी में एडमिशन के लिए क्या करना पड़ा?

चिराग ने बताया कि mitadmission.org पर अप्लाय करना होता है। उसमें को-करिकुलर एक्टिविटीज के साथ-साथ हर एक बात बतानी होती है। उसके बेसिस पर ही सिलेक्शन कमेटी स्क्रूटनी करती है। सिलेक्टेड कैंडीडेट्स का इंटरव्यू होता है और उसके बाद एडमिशन के लिए फाइनल सिलेक्शन होता है। भारत से पांच-दस स्टूडेंट्स अंडरग्रेजुएट कोर्सेस के लिए जाते ही हैं।

जब एमआईटी में एडमिशन भी हो गया था तो JEE एडवांस दी ही क्यों?

चिराग का इस पर कहना है कि यह एक टफ एग्जाम है। इसमें भाग लेना है, यह चार साल पहले यानी वे नौवीं में थे तभी डिसाइड कर लिया था। एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में जमकर पढ़ाई की और अपने आपको मजबूत किया। मैं तो कहता हूं कि जो JEE मेन्स या JEE एडवांस की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें इसके लिए बार-बार कोशिश करनी होगी। बोरियत दूर भगाने के लिए रास्ते निकालने होंगे। मैं चेस खेलता था, खाना खाने के बाद टेबल-टेनिस भी खेलता था। ताकि लगातार पढ़ाई से बोरियत महसूस न हो और मैं फ्रेश माइंड से पढ़ाई पर फोकस कर सकूं।

JEE की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए क्या सबक है?

मैं तो इतना ही कहूंगा कि मैंने परीक्षा की तैयारी के दौरान स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया। डिस्ट्रेक्शन को कम से कम रखा। लेकिन, अब सारा काम जूम पर या किसी और टूल से हो रहा है तो ऐसे में यह तो नहीं कह सकते कि स्मार्टफोन न रखें। इतना जरूर कहना चाहूंगा कि डिस्ट्रेक्शन दूर करें। पढ़ाई पर पूरा फोकस करें। बोरियत लगे तो इंटरनेट पर कुछ नया सीखें। यह बहुत काम आने वाला है।

...क्या कहना है विशेषज्ञों का

इंटरनेशनल मैग्जीन आंत्रप्रेन्योर में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में स्ट्रैटेजी एंड आंत्रप्रेन्योरशिप में माइकल डी. डिग्मैन चेयर अनिल के. गुप्ता का कहना है कि सब जगह अंडरग्रेजुएट्स का वक्त तो क्लासरूम्स और प्रोजेक्ट्स में ही चला जाता है। लेकिन ग्रेजुएट प्रोग्राम, पीएचडी प्रोग्राम और फेकल्टी रिसर्च की बात आती हैं तो आईआईटी पीछे छूट जाता है। एमआईटी जैसी यूनिवर्सिटी में फेकल्टी पर पढ़ाने का दबाव भी काफी कम होता है, जिससे उन्हें रिसर्च के लिए भरपूर वक्त मिलता है। आईआईटी में टीचर्स का ज्यादातर वक्त क्लासरूम में ही चला जाता है। वहीं, आईआईटी-इंदौर के पीआरओ कमांडर सुनील कुमार का कहना है कि हालात काफी बदल गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में आईआईटी में रिसर्च तेजी से बढ़ा है। इस पर फोकस भी बढ़ गया है।

रैंकिंग में आईआईटी पीछे क्यों?

कुछ महीने पहले सात प्रमुख आईआईटी (बॉम्बे, दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, खड़गपुर, मद्रास और रूडकी) ने तय किया था कि टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भाग नहीं लेंगे। इसके लिए उन्होंने संयुक्त बयान भी जारी किया था। उनका कहना था कि उन्हें इस रैंकिंग की पारदर्शिता पर भरोसा नहीं है। आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर ने पिछले साल कहा था कि यदि दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा टेक स्टार्टअप्स/यूनीकॉर्न्स हैं, तो उसमें आईआईटी दिल्ली की भूमिका जरूर है। यदि भारतीयों के बनाए 24 यूनीकॉर्न्स में से 14 आईआईटी-दिल्ली के पूर्व छात्रों की देन है तो हम कुछ तो अच्छा कर रहे होंगे।



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