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कोरोना के बाद मरीज फिटनेस मेंटेन करने के लिए परेशान, जानिए एक्सरसाइज के दौरान किन 6 बातों का ध्यान रखें https://ift.tt/32WXDVQ

अमेरिकी डॉक्टर जॉर्डन डी. मेटजल पिछले 20 साल से क्लिनिक चलाते हैं। कहते हैं कि जब भी कोई पेशेंट बीमारी के बाद उनसे एक्सरसाइज के बारे में पूछता है, तो वे एक ही बात कहते हैं कि अपने शरीर की सुनें। ऐसी एक्सरसाइज करें, जिसे आप आसानी से कर सकते हैं। हालांकि कोरोना ने इस तरीके को बदल दिया।

डॉक्टर जॉर्डन बताते हैं कि शुरुआती दिनों में कोरोना से ठीक हुए कुछ मरीजों को पुरानी एक्टिविटी लेवल को मेंटेन करने में काफी दिक्कत हो रही है। कुछ मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, तो कुछ को ज्यादा थकान हो रही है। जबकि कुछ को लगता है कि उनकी फिटनेस पहले जैसी नहीं हो सकती। कइयों को हार्ट की दिक्कत आ रही है। कुछ एक रेयर केस में मरीजों को हार्ट अटैक और ब्लड क्लॉटिंग की समस्या भी हुई है।

सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात यह है कि ये समस्याएं उन मरीजों में भी देखने को मिलीं हैं, जिनको कोरोना के माइल्ड सिमटम थे और जिन्हें कभी हॉस्पिटल में भर्ती नहीं होना पड़ा था।

शरीर में ब्लड फ्लो बिगड़ने से हो रही हार्ट की दिक्‍कत

40 के उम्र वाले साइक्लिस्ट को कोरोना के सिंप्टम्स के तौर पर पैरों में दर्द दिखा। इससे यह पता चलता है कि कोरोना और उसके बाद शरीर में ब्लड फ्लो ठीक से नहीं होता। कोरोना के बाद यानी पोस्ट-कोविड में हार्ट की समस्या सबसे बड़ी चुनौती है।

JAMA कार्डियोलॉजी के एक स्टडी के मुताबिक 49 साल की औसत उम्र वाली 100 जर्मन महिलाओं में से 78% में हार्ट की दिक्‍कत सामने आई। यह भी एक वजह है जो हमारी फिटनेस लेवल को बुरी तरह प्रभावित करती है।

कोरोना के बाद फिटनेस के लिए जूझ रहे एथलीट्स

कोरोना से ठीक होने के बाद फिटनेस के लिए जूझ रहे खिलाड़ियों के अनगिनत किस्से सामने आए हैं। अमेरिकन ओलिम्पिक टीम की दर्जन भर से भी ज्यादा महिला खिलाड़ियों ने बताया कि कोरोना से रिकवर होने के बाद थकान हफ्तों-हफ्तों तक उनका पीछा नहीं छोड़ रही है।

रनर समेत कुछ एथलीट्स ने बताया कि एक्सरसाइज करने के दौरान वे जरूरत से ज्यादा हांफ रहे हैं। कोरोना के बाद पोस्ट-कोविड स्टेज में सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जो अगले कुछ हफ्तों और महीनों तक पीछा नहीं छोड़ रही है।

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क्या कहती है रिसर्च?

माइल्ड या मॉडरेट कोरोना से ठीक हुए लोगों को फिर से अच्छी फिटनेस पाने में मदद करने के लिए डॉक्टर जॉर्डन ने एक गाइडलाइन तैयार की है। उनका दावा है कि यह गाइडलाइन एविडेंस पर आधारित है। इस गाइडलाइन का नाम है “रिटर्न टु एक्टिविटी।”

गाइडलाइन के मुताबिक जिसे भी कोरोना या दूसरी बीमारियों के चलते हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा, उन्हें डॉक्टरों की सलाह पर ही एक्सरसाइज करनी चाहिए। लेकिन अगर किसी की तबीयत जरा सी भी खराब है, भले ही उसे कोरोना के सिस्टम्स न हों तो भी उसे एक्सरसाइज से पहले खुद को फिट करना चाहिए।

कोरोना से ठीक होने के बाद एक्सरसाइज के दौरान 6 बातों का रखें ध्यान

1. बीमार हैं तो न करें एक्सरसाइज

गाइडलाइन के मुताबिक अगर आप बीमार हैं तो आप एक्सरसाइज के लिए न जाएं। आमतौर पर जब हम बीमार होते हैं तो हमारी एनर्जी लेवल घट जाती है। ऐसे में एक्सरसाइज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

2. कोरोना के बाद एक्सरसाइज की धीमी शुरुआत करें

आपको सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द के बगैर भी अगर माइल्ड सिंप्टम्स हैं तो आपको एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। कम से कम एक हफ्ते तक तो एक्सरसाइज बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

3. दोबारा सिंप्टम्स दिखे तो बंद कर दें एक्सरसाइज

अगर आपको एक्सरसाइज के बाद सिमटम दिख रहे हैं तो आप एक्सरसाइज करना तुरंत बंद कर दें। सीने में दर्द, खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ पोस्ट-कोविड सिंप्टम्स हैं। इसलिए इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर एक्सरसाइज न करें।

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4. सीने में दर्द होने पर कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह लें

गाइडलाइन के मुताबिक कुछ मरीज जिन्हें सीने में दर्द जैसी दिक्कत लगातार हो रही है, उन्हें एक्सरसाइज से पहले कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क जरूर करना चाहिए।

5. कोरोना का है लक्षण तो टेस्ट कराएं

अगर आपको कोल्ड और फ्लू है और यह लगातार बना हुआ है तो सबसे पहले कोरोना टेस्ट कराएं। कोरोना में एक्सरसाइज करना बेहद खतरनाक हो सकता है और ये उसके सबसे आम लक्षण हैं। एक टेस्ट से आप खुद को एक्सरसाइज पर लौटने से पहले सुरक्षित कर सकते हैं।

6. शरीर के बर्ताव को नोटिस करें

एक डॉक्टर सिर्फ आपका टेस्ट कर सकता है। लेकिन आप खुद की बॉडी को किसी दूसरे की तुलना में कहीं बेहतर जानते हैं। आप जानते हैं कि आमतौर पर सीढ़ी चढ़ने, दौड़ने और साइकल चलाने के दौरान आप कैसा फील करते हैं।

इसे करके आप खुद को चेक करें, सोचें की जब आपको कोरोना हुआ था तो ये करना आपके लिए कितना मुश्किल था और अब कितना मुश्किल हो रहा है। अगर आपको जरा भी शक हो रहा हो तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।



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