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खेती में फायदा नहीं हुआ तो नई तकनीक से अमरूद उगाना शुरू किया, अब हर साल 10 लाख की कमाई https://ift.tt/3aL8ruY

क्या आपने कभी डेढ़ से दो किलो का अमरूद देखा है ? आज हम आपको एक ऐसे ही किसान से मिलवाने जा रहे हैं, जो अपने खेत में इतने बड़े अमरूद उगाते हैं। गुजरात के टंकारा तहसील के रहने वाले मगन कामरिया नई तकनीक से अमरूद की खेती करते हैं। जिससे बड़े आकार और 2 किलो तक वजन का अमरूद पैदा होता है। अब वे 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अमरूद की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें हर साल 10 लाख रुपए की कमाई हो रही है।

मगन कहते हैं कि पहले वे कपास, मूंगफली और जीरा उगाते थे। लेकिन, उसमें लागत के हिसाब से कमाई नहीं हो रही थी। पांच साल पहले उन्हें इजरायली तकनीक से उगाए जाने वाले अमरूद के बारे में पता चला। उन्होंने तय किया कि वे भी अमरूद की खेती करेंगे। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायपुर से थाईलैंड में उगाए जाने वाले अमरूद के 5 हजार पौधे मंगाए।

इजराइली तकनीक से अमरूद उगाते हैं
मगन कहते हैं कि मैंने सबसे पहले इजरायली टेक्नोलॉजी से अमरूद उगाना सीखा। इसमें टपक विधि से सिंचाई करते हैं। पौधों पर बूंद-बूंद पानी टपकाया जाता है। इससे फसल अच्छी होती है और पानी की खपत भी कम होती है। इतना ही नहीं, रोज-रोज की सिंचाई से छुटकारा मिल जाता है।

मगन के पास सूरत, नवसारी, वडोदरा, अहमदाबाद, मोरबी और राजकोट तक से व्यापारी अमरूद खरीदने आते हैं।

डेढ़ साल में ही मेहनत रंग लाई
करीब एक-डेढ़ साल की मेहनत के बाद ही मगन को उनकी मेहनत का फल अमरूद के रूप में मिलने लगा। कम ऊंचाई वाले पौधों में ही 350 ग्राम से डेढ़ किलो वजन तक के अमरूद उगने लगे। इन अमरूदों का स्वाद भी इतना अच्छा था कि उन्हें इसकी अच्छी कीमत मिली।

दूसरी फसलों से कम मेहनत लगती है
खेती में मगन का साथ देने वाली उनकी पत्नी पुष्पाबेन बताती हैं कि इन पौधों की बहुत देखरेख करनी पड़ती है। हर पौधे की जांच करनी पड़ती है कि वे कीड़ों का शिकार न हो जाएं। हालांकि, कुछ घरेलू नुस्खों से ही फसल की सुरक्षा की जा सकती है। इसके बावजूद वे कहती हैं कि इसमें दूसरी फसलों से कम मेहनत लगती है।

खेत से ही बिक जाते हैं अमरूद

आज मगन 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अमरूद की खेती कर रहे हैं। इस साल उनके खेत में 35 टन अमरूद का उत्पादन हुआ है।

मगन बताते हैं कि इन अमरूदों के बारे में कहावत है कि 'एक बार चखोगे तो याद रखोगे'। इनका स्वाद इतना अच्छा होता है कि लोगों की इनकी लग जाती है। इसी वजह से इन अमरूदों की बहुत डिमांड है। वे बताते हैं कि आज उनके अमरूद इतने फेमस हो गए हैं कि अब इन्हें बेचने बाजार नहीं ले जाना पड़ता। खेत से ही सारे अमरूद बिक जाते हैं। सूरत, नवसारी, वडोदरा, अहमदाबाद, मोरबी और राजकोट तक से व्यापारी उनके पास आते हैं।

कैसे करें ऑर्गेनिक अमरूद की खेती
ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी शुरू करने से पहले रिसर्च जरूरी है। आपको जहां खेती करनी है वहां के मार्केट, डिमांड और ट्रांसपोर्टेशन के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ ही हम जिस जमीन पर बागवानी शुरू करने जा रहे हैं, वो कम पानी वाली होनी चाहिए। केमिकल की जगह ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है।

दो पौधों के बीच 9/6 की दूरी होनी चाहिए। जुलाई से सितंबर के महीने पौधे लगाए जाते हैं। अच्छे किस्म की अमरूद के पौधे लगभग एक साल में तैयार हो जाते हैं। पहले साल में एक पौधे से 6-7 किलो तक अमरूद निकलता है। कुछ समय बाद 10-12 किलो तक उत्पादन होने लगता है।

मगन की पत्नी पुष्पाबेन बताती हैं कि हर पौधे की यह भी जांच करनी पड़ती है कि वे कीड़ों का शिकार न हो जाएं।

क्या- क्या सावधानियां जरूरी?

अमरूद की बागवानी के लिए सही समय और सही मिट्टी का होना जरूरी है। इस पर क्लाइमेट और बारिश का असर ज्यादा होता है, इसलिए उसके लिए पहले से तैयारी जरूरी है। ज्यादा प्रोडक्शन के लिए अक्सर लोग केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग करने लगते हैं। लेकिन, हमें इससे बचना चाहिए। इससे प्लांट को नुकसान तो होता ही है, साथ ही हमारी जमीन की सेहत के लिए भी ये ठीक नहीं होता है।



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गुजरात की टंकारा तहसील में रहने वाले मगन कामरिया के अमरूद इतने फेमस हैं कि अब व्यापारी खेत से ही उनकी फसल खरीद ले जाते हैं।


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