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बचपन में ल्यूकोडर्मा हुआ, 15 साल नेगेटिविटी में रहीं; अब चॉकलेट बिजनेस से फैला रहीं पॉजिटिविटी https://ift.tt/372l0jB

आज की कहानी मुंबई की 26 साल की शालिनी गुप्ता की है। शालिनी 9 साल की थीं तो उनकी स्किन पर सफेद दाग नजर आने लगे। माता-पिता को लगा कि ये कोई बीमारी है। वे शालिनी को डॉक्टर के पास ले गए। वहां पता चला कि शालिनी को कोई बीमारी नहीं बल्कि ल्यूकोडर्मा है। यह एक तरह की स्किन कंडीशन है।

इसके बाद शालिनी की जिंदगी ही बदल गई। उन्हें लेकर परिवार का बर्ताव भी बदल गया। करीब 15 साल तक शालिनी ने घुट-घुटकर जीती रहीं। पिछले साल फरवरी में शालिनी ने सेल्फ डेवलपमेंट की ट्रेनिंग ली। उन्होंने तय किया वे जिसे समाज कमी मानता है वे उसे ही अपनी ताकत बनाएंगी। शालिनी ने फैसला लिया कि वे ऐसा काम करेंगी, जिसमें पॉजिटिविटी हो।

आखिरकार शालिनी ने 2019 में अपने बिजनेस ‘पॉजिटिव चॉकलेट बाय शालिनी’ की शुरुआत की। शालिनी के मुताबिक, मेरी कोशिश है कि मैं लोगों को खुद से प्यार करना सिखाऊं। मेरे इस बिजनेस का मकसद है- स्प्रेड लव विथ चॉकलेट। मैं डार्क चॉकलेट बनाती हूं। यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है।

मेरी ख्वाहिश है कि मैं लोगों में पॉजिटिविटी ला सकूं इसलिए हर चॉकलेट पीस के साथ एक पेपर स्लिप पर अपने हाथों से पॉजिटिव मैसेज लिखकर देती हूं।’

ल्यूकोडर्मा के कारण बचपन में शालिनी के शरीर पर सफेद दाग हो गए थे।

अपने शुरुआती जीवन के बारे में शालिनी ने बताया कि मुझे ल्यूकोडर्मा हुआ, उस वक्त मैं नानी के घर रहती थी। डॉक्टर के पास से नानी के घर पहुंची तो परिवार का बर्ताव पूरी तरह बदला नजर आया।

घर में नानी बैठी हुई थीं। उन्होंने आवाज देकर पानी मांगा। वहां कोई नहीं था तो मैं उठकर गई और नानी को पानी का गिलास देने लगी। उन्होंने कहा कि मैं तेरे हाथ से पानी नहीं पीयूंगी। तब मुझे बहुत धक्का लगा। आखिर इसमें मेरी क्या गलती है जो मुझसे ऐसे भेदभाव किया जा रहा है। कल तक जो नानी मुझसे प्यार करती थीं, वहीं आज मेरे हाथ का पानी पीने से मना कर रही हैं।

शालिनी बताती हैं कि ल्यूकोडर्मा की पहचान होने के बाद उनके मम्मी-पापा ने भी उन्हें शादियों और किसी पब्लिक प्रोग्राम में ले जाना बंद कर दिया। उन्हें लगता था कि लोग क्या सोचेंगे।

वह कहती हैं कि ल्यूकोडर्मा का पता चलने के बाद से मेरा डॉक्टर्स के यहां आना-जाना शुरू ​हो गया था। एलोपैथी से लेकर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक डॉक्टर्स के पास जाना लगा रहा। आए दिन मैं किसी न किसी डॉक्टर के क्लीनिक के बाहर लाइन में बैठकर अपने नंबर का इंतजार करती थी। मुझे सिर्फ इस बात का इंतजार रहता था कि कब डॉक्टर मुझे चेक करे और मैं अपनी जान छुड़ाकर वहां से भागूं।

एक वक्त में 24 गोलियां लेनी पड़ती थीं

शालिनी कहती हैं कि मैं छठवीं क्लास में पढ़ती थी तो एक ही वक्त पर 24 गोलियां लेनी होती थी। मुझे दवाइयां खाना पसंद नहीं था लेकिन पैरेंट्स के दबाव में वह सब करना पड़ता था। इन दवाइयों के साथ बहुत सारे रेस्ट्रेक्शन लगने लगे। पैरेंट्स कहते थे कि चॉकलेट नहीं खाना, टमाटर नहीं खाना, दही नहीं खाना, नॉनवेज नहीं खाना है।

उस वक्त मुझे बहुत से परहेज करने होते थे। मुझे सबसे ज्यादा दुख चॉकलेट नहीं खाने का था। चॉकलेट ऐसी चीज होती है जो बचपन में हर बच्चे की फेवरेट होती है। किसी बच्चे से अगर चॉकलेट छीन लो तो उस पर क्या बीतती है यह कोई बच्चा ही जान सकता है।

पैरेंट्स रोकते थे, इसलिए छिपकर खाईं चॉकलेट

शालिनी ने बताया कि उस वक्त मुझे पांच रुपए पॉकेटमनी मिलती थी, ताकि स्कूल ब्रेक के दौरान भूख लगे तो कुछ खा सकूं। घर आकर मम्मी पूछती थीं कि क्या खाया तो मैं झूठ बोल देती थी कि वड़ा पाव खाया या जूस पी लिया। मैं पैसे बचाकर चॉकलेट खाती थी। कभी अपनी फैमिली के सामने चॉकलेट नहीं खा पाई।

शालिनी कहती हैं कि लोग क्या सोचेंगे, इसकी वजह से मुझे काफी परेशानियां झेलनी पड़ीं। मुझे कई साल तक घर में ही बंद रहना पड़ा।आखिरकार एक वक्त आया जब मैंने घर में कैद रहने का विरोध जताना शुरू किया। मैंने कहा कि मुझे भी बाहर जाना है और खुलकर अपनी लाइफ जीनी है।

तब मेरे पैरेंट्स को भी समझ आया कि ये कोई बीमारी नहीं बल्कि एक स्किन कंडीशन है। धीरे-धीरे मैं बाहर निकलने लगी, पैरेंट्स भी साथ लेकर जाने लगे।

शालिनी कहती हैं- मैं सिर्फ चॉकलेट का बिजनेस नहीं करना चाहती थी, इसके साथ-साथ मुझे पॉजिटिविटी भी फैलानी थी।

वह कहती हैं कि मम्मी हमेशा से चाहती थीं कि मैं चार्टर्ड अकाउंटेंसी करूं। इसलिए मैंने सीए की पढ़ाई शुरू कर दी। दो साल पहले मैंने महसूस किया कि मैं सीए तो अपनी मम्मी की वजह से कर रही हूं। ये मुझे कभी करना ही नहीं था। मैंने कोई और विकल्प भी एक्सप्लोर ही नहीं किया था।

इसलिए मैंने अपनी पर्सनैलिटी पर काम करना शुरू किया और समझा कि आखिर मैं क्या करना चाहती हूं। तब मुझे समझ आया कि मेरा सबसे बड़ा पैशन चॉकलेट है।

चॉकलेट बिजनेस शुरू करने के बारे में शालिनी कहती हैं कि जो चीज मेरी सबसे फेवरेट थी, उसे कई साल तक मुझसे दूर रखा गया। मैंने सोचा क्यों न मैं उसी को लेकर कुछ करूं। मैं सिर्फ चॉकलेट का बिजनेस नहीं करना चाहती थी, इसके साथ-साथ मुझे पॉजिटिविटी भी फैलानी थी।

शालिनी कहती हैं कि कुछ लोग तो सफेद दाग को अभी भी छुआछूत की बीमारी मानते हैं। वह कहती हैं ‘ अगर आपको कोई चीज पसंद है तो उसे पीछे मत छोड़िए, उसे लेकर आगे बढ़िए, बिना ये सोचे कि लोग क्या कहेंगे और क्या सोचेंगे।’



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In childhood, leukoderma occurred for 15 years in negativity; Now Positivity is spreading from its chocolate business


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