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सर्दियों में बढ़ जाते हैं सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर के केस, जानिए ये क्या है और इससे कैसे बचें? https://ift.tt/2JSxXDH

मौसम बदलने के साथ-साथ हमारे खाने-पीने से लेकर पहनावे तक का रुटीन बदल जाता है। इस सबके चलते हमारे मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हम मानसिक तौर पर परेशान होने लगते हैं। कभी-कभी यह बदलाव हम पर कुछ ज्यादा ही भारी पड़ जाता है। मेडिकल की दुनिया में इसे सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर कहा जाता है।

दिल्ली में सायकायट्रिस्ट डॉक्टर स्नेहा त्रिपाठी कहती हैं कि अभी कोरोना चल रहा है और सर्दी भी आ चुकी है, ऐसे में सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर का जोखिम ज्यादा है। खासतौर पर उनके लिए, जो कोरोना के चलते पहले से ही तनाव, डिप्रेशन या अकेलेपन का शिकार हैं।

क्या होता है सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर?

  • मौसम की वजह से होने वाले बदलावों से हमारी मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। इसके चलते गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव भी होने लगता है। ये कई बार डिप्रेशन की वजह भी बनता है यानी मौसम बदलने से भी डिप्रेशन हो सकता है।
  • ऐसे मानसिक असंतुलन की वजह से जो तनाव और डिप्रेशन होता है, उसे ही सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं। सर्दियों की शुरुआत में शुरू होने वाला यह डिसऑर्डर यूं तो गर्मी में भी हो सकता है, लेकिन गर्मी की तुलना में इसके मामले सर्दियों में ज्यादा सामने आते हैं। इसके अलावा पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसके लक्षण ज्यादा देखने को मिलते हैं।

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धूप की कमी सबसे बड़ी वजह

सीजनल डिसऑर्डर की कई वजहें होती हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि धूप की कमी इसका सबसे बड़ा कारण है। सर्दियों में कई दिनों तक धूप नहीं निकलती, जिसके चलते शरीर में नेचुरल विटामिन D नहीं पहुंचता। यह लोगों को चिड़चिड़ा बना देता है, लेकिन इसकी और भी बहुत सारी वजहें होती हैं। अगर आपको मौसम बदलने से पहले ही मानसिक या शारीरिक समस्या है तो इसका जोखिम और भी ज्यादा हो जाता है।

सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर के लक्षण

  • सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर के कई लक्षण होते हैं। इसमें मानसिक लक्षण सबसे ज्यादा सामने आते हैं। इसके शारीरिक लक्षण भी हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आप मानसिक लक्षणों से छुटकारा पा सकते हैं तो शारीरिक लक्षण अपने आप ही गायब हो जाएंगे।
  • इसमें बहुत ज्यादा मूड डायवर्ट होता है। जिसे हम मूड स्विंग भी कहते हैं। चिड़चिड़ापन जरूरत से ज्यादा होने लगता है। पीड़ित लगातार छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव में रहने लगता है और बात-बात पर गुस्सा आना आम है।
  • इस स्टेज में भूख नहीं लगती, आलस आता है, शरीर सुस्त रहता है, लेकिन नींद भी नहीं आती। जब ये सारी समस्याएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं तो ये डिप्रेशन में भी बदल जाती हैं। इससे उबरने में काफी समय लगता है।

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बचने और इलाज का तरीका आसान

इससे बचने के लिए विटामिन D सबसे ज्यादा जरूरी है। विटामिन D शरीर में सेरोटॉनिन का लेवल बढ़ा देता है। यह हमारे शरीर में पाया जाने वाला एक केमिकल होता है, जो हमारे मूड को कंट्रोल या संतुलित रखता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसकी कमी होने से हम जरूरत से ज्यादा रिएक्ट करने लगते हैं।



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Cases of seasonal affective disorder change in winter, know what happens and how to avoid?


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