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लक्ष्य-एमजीआर जैसी सफलता पाना, खतरा- विजयकांत जैसा हश्र हो जाना https://ift.tt/2Lauq3W

‘कोई नहीं जानता कि मैं कब और कैसे आऊंगा, लेकिन मैं जब भी आऊंगा राइट टाइम पर आऊंगा।’ यह तमिल सिनेमा के सुपर स्टार रजनीकांत के कई मशहूर डायलॉग में से एक है और 2021 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी बनाने की उनकी घोषणा पर बिल्कुल सटीक बैठता है। 12 दिसंबर, 1950 को बेंगलुरू में एक मराठी परिवार में पैदा हुए शिवाजी राव गायकवाड़ तमिलनाडु आकर ही रजनीकांत बने।

वे तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार में एक कहलाए और अब एमजीआर, एम. करुणानिधि (स्क्रिप्ट राइटिंग), जयललिता, विजयकांत की तरह सिनेमा से राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। बकौल रजनीकांत राजनीति में उनकी एंट्री का राइट टाइम आ चुका है।

69 साल के दिग्गज सिने कलाकार ने गुरुवार को बताया कि वे 31 दिसंबर को पार्टी की घोषणा करेंगे और जनवरी में इसकी लॉन्चिंग होगी। उन्होंने नारा दिया कि अभी नहीं तो कभी नहीं। हम सबकुछ बदल देंगे। रजनीकांत की यह घोषणा कुछ मायनों में चौंकाने वाली भी है। अक्टूबर में उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य चिंताओं के कारण कोरोना महामारी के इस दौर में डॉक्टरों ने उन्हें राजनीति में उतरने से मना किया है।

लेकिन, रजनीकांत ने आखिरकार गुरुवार को दो दशक के सस्पेंस को खत्म करते हुए नई पार्टी की घोषणा कर ही दी। रजनी ने कहा, ‘राजनीति में उतरने के बाद मैं जीतूं या हारूं सब कुछ जनता का है। अगर मैं जीता तो यह उनकी जीत होगी। अगर मैं हारा तो यह उनकी भी हार होगी। यह समय तमिलनाडु का भाग्य बदलने का है।

राजनीतिक विश्लेषक रंगराजन कहते हैं, ‘रजनीकांत निश्चित रूप से तमिलनाडु की राजनीति पर असर डालेंगे। उनका फैन बेस बहुत बड़ा है और साथ ही युवाओं में अपील भी है। हालांकि, यह आकलन करना मुश्किल है कि उनकी पार्टी कितनी सीटें जीतेगी।

परिणाम चुनावी साझीदारों, मजबूत उम्मीदवार, जातीय ध्रुवीकरण जैसे कई मुद्दों पर निर्भर होंगे। रजनी की पार्टी एआईडीएमके और डीएमके जैसी पार्टियों के दूसरे और तीसरे दर्जे के नेताओं को आकर्षित करेगी क्योंकि यहां उन्हें टिकने मिलने की संभावना ज्यादा नजर आएगी।

अपने दम पर उतर सकती है रजनी की पार्टी

राजनीतिक विश्लेषक राधाकृष्णन बताते हैं, ‘2017 में रजनीकांत ने कहा था कि उनकी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि, ऐसा करने पर उनकी पार्टी का वही हश्र हो सकता है जो 2006 के चुनावों में एक अन्य फिल्म स्टार विजयकांत की पार्टी का हुआ था।

विजयकांत की पार्टी 2006 में सभी 234 सीटों पर लड़ी थी। लेकिन, सफलता सिर्फ एक पर मिली। साथ ही कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, वाइको की एमडीएमके और वीसीके अभी डीएमके की साझीदार हैं और वे डीएमएक गठबंधन को नहीं छोड़ना चाहेंगी।

रजनी फैन क्लब में 1 करोड़ से ज्यादा सदस्य, यानी राज्य के 18% से 20% मतदाता

रजनीकांत ने 2018 में अपना फैन क्लब आरएमएम लॉन्च किया था। ऑनलाइन लॉन्च किए गए इस क्लब में दो दिन में ही 50 हजार फैन रजिस्टर्ड हो गए। हर फैन को वोटरआईडी के साथ रजिस्टर होना था। लॉन्चिंग के एक सप्ताह बाद ही ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिया गया।

फरवरी 2018 के पहले सप्ताह तक इसके 50 लाख सदस्य हो चुके थे। जुलाई तक यह आंकड़ा 1.20 करोड़ के पार जा चुका था। करीब 6 करोड़ की आबादी वाले तमिलनाडु के लगभग 18-20 फीसदी मतदाता रजनीकांत के रजिस्टर्ड फैन हो चुके थे। बता दें कि 1996 में रजनीकांत ने कहा था कि अगर जयललिता फिर सत्ता में आती हैं तो ईश्वर भी तमिलनाडु को नहीं बचा सकता है। जयललिता की पार्टी हार गई।

तमिलनाडु का दौरा करना चाहते थे रजनीकांत

  • मैंने कहा था कि जब जनता आंदोलन के लिए तैयार होती है, तभी राजनीति हो सकती है। मैं पूरे तमिलनाडु का दौरा करना चाहता था, लेकिन कोरोना के कारण यह संभव नहीं हो सका। डॉक्टरों ने मुझे राज्य का दौरा करने से मना किया है और लोगों से सीधे बात करने से भी रोका है। - रजनीकांत


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1950 को बेंगलुरू में एक मराठी परिवार में पैदा हुए शिवाजी राव गायकवाड़ तमिलनाडु आकर ही रजनीकांत बने। (फाइल फोटो)


from Dainik Bhaskar /national/news/goal-success-like-mgr-threat-fate-like-vijayakanth-127981455.html

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