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जिन्होंने कोविड टेस्ट के लिए सैंपल ही नहीं दिए, उनके मोबाइल पर भी आ रहे पॉजिटिव-निगेटिव के मैसेज https://ift.tt/3mz2jsY

गौतम कुमार एक शोरूम में काम करते हैं। इस साल जुलाई में उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट करवाया। रिपोर्ट निगेटिव आई, तो एहतियात बरतते हुए काम-धंधे में लग गए। लेकिन, पिछले महीने यानी नवंबर की 27 तारीख को जो हुआ, उसने गौतम चौंका दिया। वे कहते हैं, 'बिहार सरकार की तरफ से मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया। इसमें मेरा नाम लिखा था। साथ ही लिखा था कि 26 नवंबर को कोरोना टेस्ट के लिए जो सैंपल दिए थे, उसकी रिपोर्ट निगेटिव है। पहली बार में तो मुझे भरोसा नहीं हुआ। मैंने मैसेज दोबारा पढ़ा। तब समझ आया कि ये तो सिस्टम का बड़ा झोल है। मैंने ऐसा कोई सैंपल दिया ही नहीं, तो ये मैसेज आया क्यों?'

गौतम अकेले नहीं है, जिनके मन में ये सवाल उभरा है। 32 साल के शौकत अंसारी को भी ऐसा ही मैसेज मिला है। उन्होंने भी इस साल जुलाई में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। भास्कर से बात करते हुए वे कहते हैं, 'मैं जहां काम करता हूं, वहां एक साथी को कोरोना हो गया था। इसी के बाद हम 10-20 लोगों ने जुलाई में टेस्ट करवाया था। तब का मैसेज तभी आ गया था, लेकिन कई महीने बाद एक बार फिर सभी लोगों को इस तरह के मैसेज आए हैं।'

लोगों ने कहा- गिनती बढ़ाने कर रहे गड़बड़ी

शौकत अंसारी दावा करते हैं कि वे ऐसे करीब बीस लोगों को जानते हैं जिनके पास इस तरह के मैसेज गए हैं। इस अजीबोगरीब स्थिति को लेकर बिहार से जुड़े कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर लिखना शुरू कर दिया है। वे पूछ रहे हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है? क्या सरकारी तंत्र में बैठे लोग कोरोना टेस्ट की संख्या बढ़ाने और गिनती को बड़ा बनाए रखने के लिए ऐसा कर रहे हैं? अब सवाल उठता है कि अगर इस तरह के मैसेज आए हैं, तो उसकी वजह क्या है?

बिहार स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अगस्त में 24 घंटे में रिकॉर्ड एक लाख 21 हजार 320 सैंपल की जांच की गई है।

सरकारी कर्मचारी ने कहा- डेटा एंट्री में हुई गड़बड़

इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बिहार की राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी से सम्पर्क किया। यहां काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘ऐसा होना तो नहीं चाहिए। अगर ये हुआ है तो बड़ी बात है। इस तरह के मैसेज जिले में बने कंट्रोल रूम से भेजे जाते हैं। हर जिले का अलग कंट्रोल रूम है। जिले के केंद्र पर जो सैंपल लिए जाते हैं, उसमें दिए गए डेटा के अनुसार ही मैसेज भेजे जाते हैं। थोड़ा रूककर वे कहती हैं, वो सकता है कि डेटा फीड करने वाले ने गलत कोरोना आईडी डाल दी हो और इस वजह से ऐसा हुआ हो।

सरकार टारगेट पूरा करने की जल्दी में

राज्य में ग्रामीण स्तर पर काम कर रहे राकेश कुमार (बदला हुआ नाम) इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक, ऐसी लापरवाही आम बात है। ये नीचे से ऊपर तक सबकी जानकारी में है। फोन पर हुई बातचीत में वे कहते हैं, 'क्या आप भी कोरोना जांच के बारे में पूछ रहे हैं। अब तो बिहार में कोई इस बारे में पूछ ही नहीं रहा है। सरकार केवल जांच के बड़े-बड़े आंकड़े चाहती है। प्रखंड और पंचायत स्तर पर करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को हर हफ्ते का टार्गेट दिया जा रहा है। उस टार्गेट को पूरा करने के लिए कई बार वे पुराने डेटा का भी इस्तेमाल कर लेते हैं। कुल मिलाकर बात ये है कि अब यहां किसी को कुछ मतलब नहीं है। सब भगवान भरोसे चल रहा है।'

कोरोना जांच की रिपोर्ट को लेकर लोगों के मोबाइल पर ऐसे मैसेज आ रहे हैं। जबकि, उन्होंने कोई सैंपल नहीं दिया।

बिहार में कोरोना जांच के आंकड़ों का खेल

मार्च और अप्रैल में बिहार सरकार की आलोचना हो रही थी, क्योंकि यहां जांच की रफ़्तार बहुत कम थी। उसके बाद एक के बाद एक दो स्वास्थ्य सचिव बदले गए। बिहार सरकार के ‘संकट मोचक’ अधिकारी प्रत्यय अमृत ने कमान संभाली और उसके बाद हर रोज बिहार सरकार कोरोना जांच को लेकर नए रिकॉर्ड बना रही है।

इसी साल अगस्त में बिहार सबसे ज़्यादा कोरोना टेस्ट करने के मामले रिकॉर्ड बना चुका है। तब स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि 24 घंटे में रिकॉर्ड एक लाख 21 हजार 320 सैंपलों की जांच की गई है। हर दिन जांच का यह आंकड़ा देश में सबसे ज्यादा है। लेकिन, जानकार लगातार बिहार में हो रहे कोरोना टेस्ट पर सवाल उठा रहे हैं।

30 सितंबर को पूरे भारत में 14 लाख से ज्यादा टेस्ट हुए और 80 हजार से अधिक नए संक्रमणों का पता लगा। जबकि, बिहार में इसी दिन में 1.31 लाख से ज्यादा टेस्ट हुए और सिर्फ 1435 नए मरीजों का पता लगा। पूरे भारत के मुकाबले बिहार में नए मरीजों के मामले इतने कम आने की वजह जानकार टेस्टिंग को मानते हैं। भारत में जहां तकरीबन 60% आरटी-पीसीआर टेस्ट हो रहे हैं, वहीं बिहार में इसकी दर केवल 10-20% के बीच है।

अगर मौजूदा समय में बिहार की बात करें, तो मंगलवार को बिहार में कोरोना संक्रमण के कारण पिछले 24 घंटे में पांच लोगों की मौत हुई है, जिसके बाद मरने वालों की संख्या बढ़ कर 1264 पर पहुंच गई है। प्रदेश में इसके साथ ही संक्रमण के 457 नए मामले सामने आए हैं। अब यहां संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,35,616 हो गयी है। हमने राज्य में कोरोना की स्थिति, जिन्होंने जांच के लिए सैंपल नहीं दिया उनको भी मैसेज आने और जांच में आई तेजी के बारे में बात करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सचिव प्रत्यय अमृत से सम्पर्क करना चाहा, लेकिन संपर्क नहीं हो जा सका।



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अगस्त में बिहार सबसे ज़्यादा कोरोना टेस्ट करने के मामले रिकॉर्ड बना चुका है। तब स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे में एक लाख 21 हजार 320 सैंपलों की जांच की बात कही थी।


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