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ऑनलाइन क्लासेस में दिक्‍कत, एग्जाम पैटर्न को लेकर भी कन्फ्यूजन, जानें ऐसी चुनौतियों से निपटने के तरीके https://ift.tt/3r0XOtS

सेंट जोसेफ स्कूल से 12वीं में 92.4% मार्क्स लाने वाली खुशी शर्मा भोपाल में रहती हैं। 12वीं पास करने के बाद वह IIT की तैयारी कर रहीं हैं। अनलॉक को 6 महीने हो चुके हैं। अब सबकुछ खुल चुका है, लेकिन स्कूल और कोचिंग इंस्टीट्यूट अब तक बंद हैं। खुशी कहती हैं कि ऑनलाइन क्लासेस उतनी इफेक्टिव नहीं हैं, जितनी फिजिकल क्लासेस होती हैं।

यही हाल इंदौर में NEET की तैयारी कर रहे आदित्य पाटीदार का भी है। उन्हें अगली साल मई में होने वाले NEET का एग्जाम देना है। आदित्य कहते हैं कि ऑनलाइन क्लासेस से तैयारी वैसी नहीं हो पा रही है, जिसकी NEET जैसे कॉम्पीटिटिव एग्जाम में जरूरत है।

इंदौर में एक निजी कोचिंग इंस्टीट्यूट में IIT की तैयारी करा रहे विकास लोया कहते हैं कि वे और उनकी टीम ऑनलाइन क्लासेस को इफेक्टिव बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिजिकल क्लासेस की बात ही दूसरी है। यह तब और ज्यादा जरूरी हो जाती है, जब बात IIT ओर NEET जैसे एग्जाम की तैयारियों की हो।

कन्फ्यूजन भी है

  • MHRD मंत्री रमेश पोखरियाल ने जानकारी दी कि इस बार के JEE और NEET के एक्जाम तीन या चार बार होंगे। लेकिन क्लासेस और एक्जाम पैटर्न को लेकर अभी भी क्लियरिटी नहीं है।

  • सिलेबस को लेकर जो कन्फ्यूजन था, अब वह बच्चों के लिए भारी पड़ रही है। पहले यह कहा जा रहा था कि इस बार के IIT और NEET के एक्जाम का सिलेबस छोटा कर दिया जाएगा। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि सिलेबस में कोई बदलाव नहीं होगा। विकास कहते हैं कि जिन बच्चों ने छोटे सिलेबस के आधार पर तैयारी शुरू की थी, उन्हें अब पूरा सिलेबस पढ़ना होगा, लेकिन समय ज्यादा निकल चुका है। उनके लिए सिलेबस कवर करना आसान नहीं होगा।

  • खुशी और आदित्य कहते हैं कि सरकार को गाइडलाइन को लेकर क्लियर रहना चाहिए। सस्पेंस बनाकर रखना ठीक नहीं है। इससे हमें एस्पायरेंट के तौर पर काफी दिक्कत होती है। सरकार को अब फाइनल गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए।

कन्फ्यूजन और ऑनलाइन क्लासेस की समस्याओं का क्या है समाधान?

एक्सपर्ट विकास के मुताबिक, हम सरकारी गाइडलाइन की वजह से खुद का नुकसान नहीं कर सकते। हमें सबकुछ भूल कर बस एक बात पर फोकस करना चाहिए कि एक्जाम होंगे। आप इस माइंडसेट के साथ रहेंगे तो आपका फोकस सिर्फ बेहतर तैयारी पर होगा।

अबतक जो सिलेबस को लेकर कन्फ्यूज थे और जिन्होंने शॉर्ट सिलेबस के आधार पर तैयारियां की हैं, उन्हें भी ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। जितना समय है उसे सिर्फ और सिर्फ फोकस के साथ सिलेबस को कवर करने में खर्च करें।

विकास कहते हैं कि हम ऑनलाइन क्लासेस को लेकर लेकर यूज-टू नहीं हैं। पढ़ने और पढ़ाने के प्रॉसेस में यूज-टू हो तो जाएंगे, लेकिन कॉम्पीटिटिव एग्जाम में इस तरह की नई चीजों को एक्सप्लोर करने में कहीं न कहीं फोकस डिस्ट्रैक्ट होता है। हालांकि, जो बच्चे ऑनलाइन क्लास में किसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं, वे इसे खुद के स्तर पर काउंटर कर सकते हैं।

छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए मुश्किलें ज्यादा

  • विकास कहते हैं कि बड़े शहरों के ज्यादातर बच्चे आधुनिक सुविधाओं और तकनीक से लैस हैं। उन्हें साथी और सीनियर भी मिल जाते हैं। लेकिन छोटे शहरों में जहां ऐसे एक्जाम की तैयारियों का कोई बड़ा हब या माहौल नहीं हैं, वहां के बच्चों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कहीं न कहीं ऐसे बच्चों का कॉन्फिडेंस भी कम हुआ है और उनकी तैयारी भी प्रभावित हुई है।

  • जो बच्चे इस तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि वे तैयारियों को लेकर कंस्ट्रक्टिव रहें। जिस टॉपिक पर डाउट है, उसे सॉल्व करने के लिए खुद का बेस्ट दें। अगर नहीं हो रहा है तो मार्क करें और आगे बढ़ें। इससे आप खुद का समय खराब करने से बच जाएंगे। जो एरिया वीक हो उसपर ज्यादा फोकस करें। खुद का मॉक टेस्ट लें और जब भी मौका मिले अपने टीचर्स से डाउट्स क्लियर करें।

घर पर रहकर ऑनलाइन क्लासेस के जरिए तैयारी कर रहें हैं तो इन 4 बातों का रखें ध्यान

1- सोशल मीडिया का कम से कम इस्तेमाल करें

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आजकल कई सोशल मीडिया ऐप हैं। कुछ तो ऐसे हैं, जो सिर्फ टीनएजर के लिए हैं। ऐसे ऐप से बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है, जो उनकी तैयारियों में बहुत बड़ी रुकावट हैं।

  • इससे बहुत ज्यादा डिस्ट्रैक्शन हो रहा है। सबसे पहले बच्चों को अपने फोन से बेवजह के ऐप डिलीट करने चाहिए और जितना ज्यादा हो सके स्क्रीन टाइम को कम करना चाहिए।

2- पढ़ाई के लिए घर में एक अलग जगह तय करें

  • घर पर पढ़ाई तो कर सकते हैं, लेकिन वहां क्लास जैसा माहौल नहीं बन पाता। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि बच्चे घर में एक अलग जगह तलाशें, जहां उन्हें कोई डिस्टरबेंस न हो। घर पर क्लास का माहौल बनाना जरूरी है।

3- टीवी और न्यूज पर ज्यादा ध्यान न दें

  • बच्चे एग्जाम से जुड़ी न्यूज अपडेट पर काफी फोकस करते हैं। एक क्लियर गाइडलाइंस और पॉलिसी का वेट करते हैं। सबकुछ क्लियर होने तक ये सारी चीजें उनके दिमाग में घूमती रहती हैं।

  • बच्चों को इसकी फिक्र बिलकुल नहीं करनी चाहिए कि एग्जाम कब होंगे, कैसे होंगे बल्कि पूरा फोकस तैयारियों पर रखना चाहिए।

4- स्ट्रेस न लें और छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें

  • तैयारियों के समय और खासकर तब जब एग्जाम नजदीक आ जाता है, बच्चे बहुत ही ज्यादा स्ट्रेस लेने लगते हैं। इस वजह से उनकी परफॉर्मेंस उतनी अच्छी नहीं हो पाती जितना कि उनका लेवल होता है। इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है कूल रहना और पेशेंस के साथ एग्जाम की तैयारी करना।

  • ऐसे स्ट्रेस से बचने के लिए बच्चे स्टडी के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक ले सकते हैं। कई बार लंबी सिटिंग भारी पड़ जाती है। बच्चे चाहें तो ब्रेक के दौरान म्यूजिक, गेम्स और दूसरी हॉबीज का सहारा ले सकते हैं, इससे स्ट्रेस कम होता है।



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